दस्यु सम्राट ‘ददुआ’ की कहानी: बीहड़ों का बादशाह

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट पाठा (Chitrakoot Patha) क्षेत्र में एक ऐसा डकैत (Mobster) हुआ जिसका नाम केवल यूपी ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश तक में गूंजता था, वह था दस्यु सम्राट 'ददुआ' (Dadua). ददुआ का असली नाम शिव कुमार पटेल (Shiv Kumar Patel) था और वह चित्रकूट के देवकली गांव का रहने वाला था.

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Uttar Pradesh Mobster Name Dadua: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट पाठा क्षेत्र को आजादी के बाद से ही दस्यु प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, और इसी इलाके में एक ऐसा डकैत हुआ जिसका नाम केवल यूपी ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश तक में सालों से गूंजता रहता था. वह और कोई नहीं दस्यु सम्राट ‘ददुआ’ था. 

एक आम नागरिक से खूंखार डकैत बनने का सफर:

ददुआ का असली नाम शिव कुमार पटेल था और वह चित्रकूट के देवकली गांव का रहने वाला था. डकैत से पहले वह  एक आम नागरिक की तरह अपना जीवन जी रहा था. लेकिन उसका जीवन तब बदल गया जब जमीन विवाद के चलते कुछ दबंगों ने उनके पिता की निर्मम हत्या कर दी थी. अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए उसने अपराध की दुनिया में कदम बढ़ाने का फैसला किया. कुछ ही महीनों में उन्होंने अपने पिता के हत्यारों से बदला लिया और फिर कभी घर वापस नहीं लौटे. इसके बाद वह पाठा के बीहड़ों का बादशाह बन गया और उसे लोग दस्यु सम्राट ददुआ के नाम से जानने लगे. 

गरीबों का मसीहा और समानांतर सत्ता:

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ पर लगभग ढाई सौ अपहरण, लूट और हत्या जैसे अनेकों मामले दर्ज थे. पाठा क्षेत्र के गरीब लोग उसे अपना मसीहा मानते थे. इसका कारण यह था कि वह अमीरों से पैसे लूटकर गरीबों की मदद करता था, खासकर बेटियों की शादी में पैसे देकर सहयोग देने में उनकी काफी मदद करता था. 

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वरिष्ठ पत्रकार सत्य प्रकाश द्विवेदी के मुताबिक, ददुआ पाठा के जंगलों में बैठकर ही लोकसभा, विधानसभा, और प्रधानी समेत कई चुनावों के लिए फरमान भी जारी करता था, जिसका असर चुनावों पर साफ दिखाई देता था। ददुआ के जीवित रहते ही उनका बेटा भी जिला पंचायत अध्यक्ष बना था.

ददुआ के डर और अंत की कहानी:

ददुआ के आतंक के दिनों में, गांव में शाम होते ही पूरी तरह से सन्नाटा छा जाता था. गांव वाले बताते थे कि वह किसी को मारता नहीं था, लेकिन खाने के लिए फरमान जारी करता था, जिसे डर के मारे लोगों को मजबूरन मानना ही पड़ता था. ददुआ का अंत साल  2007 में हुआ, जब बसपा की सरकार बनने पर पुलिस ने उसे एक मुठभेड़ में मार गिराया था. ददुआ के अंत के बाद भी, उनका बेटा वीर सिंह सदर सीट से विधायक रहा. 

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