SC On Netaji On National Son: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पिटीशनर को “बेकार” बताते हुए, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को “राष्ट्रीय पुत्र” घोषित करने और भारत की आज़ादी का क्रेडिट आज़ाद हिंद फौज (INA) को देने की मांग वाली PIL खारिज कर दी.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने पिटीशनर पिनाकपानी मोहंती को कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए फटकार लगाई.
‘SC में आपकी एंट्री पर बैन लगा देंगे’
CJI ने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट में आपकी एंट्री पर बैन लगा देंगे. हम पहले भी यही पिटीशन खारिज कर चुके हैं.” CJI ने पिटीशनर को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर भी पहचाना, जिसे पहले भी फालतू PIL फाइल करने के लिए फटकार लगाई गई थी.
नेताजी को भारत का “राष्ट्रीय पुत्र” घोषित करने की मांग
जब CJI ने पूछा कि क्या उन्होंने पहले भी ऐसी कोई पिटीशन फाइल की है, तो मोहंती ने हिंदी में जवाब दिया, “इस बार अलग है.” जब पूछा गया कि पिटीशन किसने ड्राफ्ट की, तो मोहंती ने एक “मुखर्जी सर” की पहचान की, जिससे बेंच और नाराज़ हो गई. PIL में कई घोषणाओं की मांग की गई थी, जिसमें यह भी शामिल था कि नेताजी की INA ने 1947 में अंग्रेजों से भारत को आज़ादी दिलाई और उन्हें भारत का “राष्ट्रीय पुत्र” घोषित किया जाए.
याचिका खारिज करने के पीछे की वजह
बेंच ने कहा कि यह लोकप्रियता पाने की कोशिश थी और याचिकाकर्ता की ऐसी ही एक PIL पहले भी खारिज कर दी गई थी. इसने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि भविष्य में याचिकाकर्ता की किसी भी PIL पर सुनवाई न की जाए.
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