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Udaipur: गोगुंदा -पिंडवाड़ा हाईवे पर मौत का ढलान, सब्ज़ी बेच रही 2 महिलाओं की दर्दनाक मौत, 2 घायल

Udaipur: उदयपुर ज़िले के गोगुंदा-पिंडवाड़ा हाईवे पर रविवार को फिर एक बड़ा सड़क हादसा हुआ जिसने इस मार्ग को एक बार फिर "मौत का ढलान" साबित कर दिया। घसियार इलाके में एक तेज़ रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे सब्ज़ी बेच रही दो महिलाओं को कुचलते हुए डिवाइडर तोड़कर खाई में जा गिरी।

Published by Mohammad Nematullah

सतीश शर्मा की रिपोर्ट, Udaipur: उदयपुर ज़िले के गोगुंदा-पिंडवाड़ा हाईवे पर रविवार को फिर एक बड़ा सड़क हादसा हुआ जिसने इस मार्ग को एक बार फिर “मौत का ढलान” साबित कर दिया। घसियार इलाके में एक तेज़ रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे सब्ज़ी बेच रही दो महिलाओं को कुचलते हुए डिवाइडर तोड़कर खाई में जा गिरी। हादसे में दोनों महिलाओं की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कार सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों की पहचान खुमानपूरा, उदयपुर निवासी मांगली बाई पत्नी खेमा राम और नोजी बाई पत्नी पोखरलाल गमेती के रूप में हुई है। दोनों महिलाएं रोजाना की तरह सड़क किनारे सब्ज़ी बेच रही थीं तभी गोगुंदा की ओर से आ रही कार बेकाबू हो गई और सब कुछ पलभर में बदल गया। 

मौके पर पहुंची पुलिस

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार इतनी तेज़ गति से आ रहा था कि उसने महिलाओं को अपनी चपेट में लेने के बाद डिवाइडर तोड़ दिया और करीब 10 फीट गहरी खाई में जा गिरी। सूचना मिलते ही गोगुंदा थानाधिकारी श्याम सिंह चारण मौके पर पहुंचे और घायलों को पुलिस वाहन से उदयपुर जिला अस्पताल भिजवाया। पुलिस ने मृतकों के शवों को गोगुंदा अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया और कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

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हादसों का काला धब्बा बना गोगुंदा हाईवे

स्थानीय लोगों का कहना है कि गोगुंदा हाईवे पिछले कई वर्षों से हादसों का गवाह रहा है। यहां के तेज़ ढलान और खतरनाक मोड़ वाहनों को अनियंत्रित कर देते हैं। आए दिन होने वाले हादसों ने इस सड़क को “ब्लैक स्पॉट” बना दिया है। ग्रामीण बताते हैं कि सिर्फ बीते एक साल में यहां कई जानें जा चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाईवे किनारे रोज़ाना सब्ज़ी बाजार और ठेले लगते हैं, लेकिन इनके लिए कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं है। न तो स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं और न ही ट्रैफिक पुलिस की नियमित निगरानी होती है। ऐसे में तेज़ रफ्तार वाहन सीधा गरीबों की रोज़ी-रोटी पर कहर बनकर टूटते हैं।

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इसी ढलान पर एक के बाद हो रहे हादसे एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि आखिर गोगुंदा हाईवे पर बार-बार होने वाली मौतों का जिम्मेदार कौन है? क्या सड़क डिज़ाइन की खामी है, या फिर प्रशासनिक उदासीनता? जब तक इन ढलानों को सुरक्षित नहीं बनाया जाएगा और ट्रैफिक पर सख्ती नहीं होगी, तब तक यह सड़क यूं ही “मौत का ढलान” बनी रहेगी।

Mohammad Nematullah
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