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EPFO New Rules: नौकरी छोड़ने के बाद इतने दिनों में अब निकाल सकेंगे पूरा पैसा, EPS के लिए भी करना पड़ेगा लंबा इंतजार; यहां देखे सारी डिटेल्स

PF withdrawal rules: नए नियमों के बाद अब जहां आप पहले नौकरी छोड़ने के 2 महीने बाद ही अपना पूरा PF निकाल सकते थे. लेकिन अब इसकी सीमा बढ़ा दी गई है.

Published by Shubahm Srivastava

EPFO New Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने नियमों में एक बड़ा संशोधन करके कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है. EPFO ​​सदस्य अब अपने भविष्य निधि (PF) खाते की शेष राशि का 100% तक निकाल सकेंगे, लेकिन एक महत्वपूर्ण शर्त के साथ: सदस्यों को अपने खाते की शेष राशि का कम से कम 25% हिस्सा बनाए रखना होगा. यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति बचत पूरी तरह से समाप्त न हो और उनके पास भविष्य के लिए कुछ पूंजी हो.

इस नए नियम के तहत, सदस्य अब अपने खाते से पूरी  राशि—जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान शामिल है—निकाल सकते हैं. हालांकि, 25% राशि से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. यह शेष राशि खाते में रहेगी, ब्याज अर्जित करेगी और सेवानिवृत्ति के लिए आरक्षित निधि के रूप में काम करेगी.

निकासी की समय सीमा 12 महीने तक बढ़ी

नौकरी छूटने के बाद निकासी की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है. पहले, पूरी राशि निकालने के लिए दो महीने की प्रतीक्षा अवधि की आवश्यकता होती थी, जिसे अब बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है. इसका मतलब है कि सदस्य अब नौकरी छूटने के एक साल बाद तक, किसी भी समय अपना पीएफ निकाल सकते हैं. वहीं, पेंशन (ईपीएस) निकासी के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि की आवश्यकता होती है—जो अब 36 महीने निर्धारित की गई है.

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पुराने नियमों के तहत, पीएफ निकासी केवल सीमित परिस्थितियों में ही संभव थी, जैसे उच्च शिक्षा, घर खरीदना, शादी या गंभीर बीमारी. इन सभी कारणों के लिए अलग-अलग नियम, न्यूनतम सेवा अवधि और निकासी सीमाएँ थीं. इन जटिल आवश्यकताओं के कारण कई कर्मचारियों को परेशानी हुई.

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क्यों किए गए ये बदलाव?

ईपीएफओ का लक्ष्य इस बदलाव के माध्यम से “आसान पहुंच और वित्तीय अनुशासन” के बीच संतुलन बनाना है. संगठन का कहना है कि नई प्रणाली कर्मचारियों को सही समय पर लचीलापन प्रदान करेगी, साथ ही दीर्घकालिक बचत और सेवानिवृत्ति सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.

यह बदलाव ईपीएफओ विश्वास योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पुराने विवादों, लंबित दावों और दावा न किए गए खातों का डिजिटल रूप से समाधान करना है. इससे पीएफ निकासी प्रक्रिया पारदर्शी और सरल हो जाएगी.

सरकार का मानना ​​है कि ये बदलाव कर्मचारियों के लिए एक संतुलित समाधान हैं—ये न केवल तत्काल वित्तीय राहत प्रदान करते हैं, बल्कि डिजिटल लेनदेन, पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता को भी बढ़ावा देते हैं. इससे भविष्य निधि प्रणाली आधुनिक, सुरक्षित और विश्वसनीय बनेगी.

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Shubahm Srivastava

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