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रूस-चीन का रुख क्या, जंग में खाड़ी देश किसके साथ? समझिए मिडिल ईस्ट का पूरा पावर गेम

Middle East tension: यमन के हूती विद्रोहियों ने रेड सी क्षेत्र में हमलों का दावा किया, जबकि इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ने अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए.

Published by Shubahm Srivastava

Iran-US Israel War: शनिवार को ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों ने क्षेत्र में गंभीर तनाव पैदा कर दिया. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबरों ने देश को गहरा झटका दिया है. विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सैन्य हमला नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक और रणनीतिक संरचना पर सीधा प्रहार है. सुप्रीम लीडर की मौत को ऐसी क्षति बताया जा रहा है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी.

ईरान के साथ कौन खड़ा है?

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने बातचीत की प्रक्रिया के दौरान ईरान को कूटनीतिक रूप से व्यस्त रखा और अचानक इजरायल के साथ मिलकर हमला किया. इससे यह धारणा मजबूत हुई कि ईरान को रणनीतिक रूप से चौंकाया गया. अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के पारंपरिक सहयोगी देश संकट की इस घड़ी में उसके साथ मजबूती से खड़े हैं या नहीं. लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग रहा है. रूस और चीन को उसका प्रमुख सहयोगी माना जाता है, लेकिन हमले के समय दोनों देशों ने प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया. उन्होंने केवल कूटनीतिक समर्थन देते हुए हमलों की निंदा की, तत्काल युद्धविराम की मांग की और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा की पहल की.

ईरान समर्थित प्रॉक्सी समूहों का पलटवार

ईरान समर्थित प्रॉक्सी समूहों ने इजरायल और अमेरिकी हितों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी. यमन के हूती विद्रोहियों ने रेड सी क्षेत्र में हमलों का दावा किया, जबकि इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ने अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए. हालांकि हालिया नुकसान के बाद इन नेटवर्कों की एकजुटता और प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं.

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क्या है इस्लामिक देशों का रुख?

इस्लामिक देशों का रुख भी चर्चा का विषय बना हुआ है. खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के कुछ सदस्य देशों ने पहले कहा था कि वे अपने एयरस्पेस का उपयोग ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देंगे. इसके बावजूद, हमलों के दौरान अरेबियन सी के साथ जॉर्डन, इराक और सीरिया के हवाई क्षेत्र के उपयोग की खबरें सामने आईं. सऊदी अरब, बहरीन और कतर स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की गतिविधियों पर भी नजर रखी गई. ओमान ने कूटनीतिक समाधान की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी.

ईरान के खिलाफ कौन-कौन से देश?

ईरान के प्रमुख विरोधियों में अमेरिका और इजरायल शामिल हैं, जबकि कई यूरोपीय देश भी उसे खुला समर्थन नहीं देते. मध्य पूर्व में सऊदी अरब और यूएई के साथ उसके वैचारिक और राजनीतिक मतभेद लंबे समय से चले आ रहे हैं. दूसरी ओर, इजरायल को अमेरिका का स्पष्ट समर्थन मिला, जबकि क्षेत्रीय देशों के रुख पर बहस जारी है. यह घटनाक्रम मध्य पूर्व की शक्ति-संतुलन राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.

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Shubahm Srivastava

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