Home > विदेश > पालतू कुत्ते के चाटने के बाद काटने पड़े हाथ-पांव, UK में भारतीय मूल की मंजीत की दहला देने वाली कहानी, पढ़कर कांप उठेंगे आप

पालतू कुत्ते के चाटने के बाद काटने पड़े हाथ-पांव, UK में भारतीय मूल की मंजीत की दहला देने वाली कहानी, पढ़कर कांप उठेंगे आप

Britain News: सोचिए एक शाम आप काम से बिल्कुल नॉर्मल लौटते है, और अगली सुबह आपका शरीर पत्थर जैसा ठंडा हो जाता है. आपके होंठ नीले पड़ जाता है. सांस लेने में तकलीफ होती है, और मौत एक पल में आपके दरवाजे पर दस्तक देती है.

By: Mohammad Nematullah | Published: February 22, 2026 10:02:49 PM IST



Britain News: सोचिए एक शाम आप काम से बिल्कुल नॉर्मल लौटते है, और अगली सुबह आपका शरीर पत्थर जैसा ठंडा हो जाता है. आपके होंठ नीले पड़ जाता है. सांस लेने में तकलीफ होती है, और मौत एक पल में आपके दरवाजे पर दस्तक देती है. यह कोई हॉरर फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं है, बल्कि 56 साल की भारतीय महिला मंजीत संघा का अपना अनुभव है. जिसे डॉक्टर चमत्कार कह रहे हैं, वह असल में 32 साल की लड़ाई की कहानी है जिसमें मंजीत ने उनकी जान तो बचाई है.

लेकिन अपने दोनों हाथ और पैर हमेशा के लिए खो दिया है. एक पालतू कुत्ते के मामूली से चाटने से एक साधारण जांच के दौरान मंजीत में सेप्सिस का ऐसा जहर भर गया कि उनका दिल एक या दो बार नहीं, बल्कि छह बार धड़कना बंद हो गया था.

UK के वेस्ट मिडलैंड्स की रहने वाली 56 साल की भारतीय मूल की मंजीत संघा के लिए एक छोटा सा घाव ज़िंदगी बदलने वाली दुखद घटना बन गया था. पिछले साल जुलाई में सेप्सिस होने के बाद मंजीत के दोनों हाथ और पैर काटने पड़ा है.

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 मंजीत जो चमत्कारिक रूप से ठीक होकर इस हफ़्ते अस्पताल से घर लौटी है. अब दुनिया भर में इस जानलेवा बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाना चाहती है. डॉक्टरों का कहना है कि मंजीत के पालतू कुत्ते ने उसके शरीर पर एक छोटा सा कट या खरोंच चाट ली है. जिससे इंफेक्शन उसके ब्लडस्ट्रीम में फैल गया था. मंजीत जो पहले फार्मेसी में काम करती थी. अब बताया कि ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

24 घंटे में बदल गई ज़िंदगी

मंजीत की कहानी एक बुरे सपने जैसी है. पिछले साल जुलाई में एक शाम वह काम से लौटी तो उसे थोड़ी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी. अगली सुबह तक वह बेहोश हो गई थी. उसके हाथ और पैर बर्फ की तरह ठंडे थे, उसके होंठ नीले पड़ गए थे, और उसे सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी. हॉस्पिटल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे सेप्टिक शॉक और DIC (डिसेमिनेटेड इंट्रावैस्कुलर कोएगुलेशन) बताया है.

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यह एक ऐसी कंडीशन है जिसमें शरीर के अंदर खून के थक्के बन जाता है. इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में इलाज के दौरान मंजीत का दिल छह बार धड़कना बंद हुआ. डॉक्टरों ने बचने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन मंजीत ने मौत को मात दी है. हालांकि इंफेक्शन को रोकने के लिए सर्जनों को उसके दोनों पैर (घुटनों के नीचे) और दोनों हाथ काटने पड़े है. पैसे की मदद के लिए हाथ आगे आ रहे है.

‘गो फंड मी’ पेज के ज़रिए अब तक 30,000 पाउंड (लगभग 3.2 मिलियन रुपये) से ज़्यादा पैसे जमा किया जा चुका हैं, ताकि मनजीत और उनके पति कमलजीत संघा की ज़िंदगी फिर से पटरी पर आ सके है. इस पैसे का इस्तेमाल मनजीत के एडवांस्ड प्रोस्थेटिक्स, घर में जरूरी बदलाव और फिजियोथेरेपी के लिए किया जाएगा. मनजीत के पति ने उन्हें दुनिया की सबसे मजबूत महिला बताया है.

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