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Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या कब की है? यहां जानिए सही तिथि, महत्व और पूजा विधि के बारे में

Chaitra Amavasya 2026 | Chaitra Amavasya 2026 Kab Hai | Chaitra Amavasya 2026 Date: हिंदुओं के बीच चैत्र अमावस्या (Chaitra Amavasya 2026) के दिन का अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. लोग आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न धार्मिक कार्यों में शामिल होते हैं. इसके तहत लोग गंगा नदी में पवित्र स्नान करने के साथ पितृ तर्पण, पितृ पूजा और हवन भी करते हैं.

By: JP Yadav | Last Updated: March 17, 2026 10:43:04 AM IST



Chaitra Amavasya 2026 | Chaitra Amavasya 2026 Kab Hai | Chaitra Amavasya 2026 Date: हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या का बहुत महत्व है, जो गुरुवार (19 मार्च, 2026) को देश-दुनिया में मनाई जाएगी. ऐसी मान्यता है कि चैत्र अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध करना शुभ होता है. हिंदू धर्म को मानने वाले लोग  इस दिन पूजा और दान तो करते ही हैं साथ ही ध्यान भी करते हैं. कहा जाता है कि चैत्र अमावस्या पर किए गए धार्मिक कार्यों से लोगों को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. इसके साथ ही पितृ दोष से मुक्ति तो मिलती ही है साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी हासिल होता है. वैसे तो अमावस्या हर महीने एक बार आती है.

यह दिन पूर्वजों और पितरों का सम्मान करने के लिए समर्पित है. लोग अपने पूर्वजों के प्रति सच्ची प्रार्थना करते हैं और उनका आशीर्वाद पाने के लिए पूजा-पाठ के अनुष्ठान करते हैं. कुछ जानकारों का कहना है कि इस महीने चैत्र अमावस्या (18 मार्च, 2026 को पड़ेगी) इस दिन को ‘न्यू मून डे’ (अमावस्या का दिन) के नाम से भी जाना जाता है. बहुत कम लोग जानते हैं कि यह दिन वसंत ऋतु के आगमन और शीत ऋतु की समाप्ति का प्रतीक भी माना जाता है.

18 या 19 कब मनाई जाएगी चैत्र अमावस्या? 

वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्च 2026 में अमावस्या की तारीख बुधवार (18 मार्च, 2026) को सुबह 8 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी. इसके बाद गुरुवार (19 मार्च) को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि 19 मार्च को होगी तो ऐसे में  चैत्र अमावस्या गुरुवार (19 मार्च 2026) को मनाई जाएगी. हिंदू धर्म में मान्यता है कि इस दिन भक्त पितृ तर्पण, श्राद्ध और पूर्वजों की शांति के लिए विशेष पूजा करते हैं.

चैत्र अमावस्या 2026: तिथि और समय

अमावस्या शुरू – 18 मार्च, 2026 – सुबह 08:25 बजे 
अमावस्या समाप्त – 19 मार्च, 2026 – सुबह 06:52 बजे

चैत्र अमावस्या 2026 का महत्व

अमावस्या को पूर्वजों और पितरों को प्रसन्न करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है. हिंदू धर्म में इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है.   हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्च महीने में पड़ने वाली अमावस्या को ‘चैत्र अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है. व्रत रखने और पूर्वजों से संबंधित पूजा-पाठ करने के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.

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क्या है मान्यता 

 ऐसी मान्यता है कि यह दिन पितृ दोष, नकारात्मकता, पापों और कर्म दोषों को दूर करने में सहायक होता है.सामान्य तौर पर हिंदू धर्म को मानने वाले लोग इस दिन गंगा नदी में पवित्र स्नान करते हैं.  कर्मों की शुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए यह सबसे शक्तिशाली दिनों में से एक है.  इस समय सूर्य मीन राशि में गोचर कर रहे होते हैं.लोग पितरों और दिवंगत आत्माओं से संबंधित अनुष्ठान करके भी अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं

चैत्र अमावस्या 2026: जानें पूजा विधि

1. गंगा नदी में पवित्र स्नान करना सबसे पुण्यकारी अनुष्ठानों में से एक है.
2. भगवान सूर्य को जल अर्पित करना अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है.
 3. तुलसी के पौधे के पास दीपक (दीया) जलाना चाहिए, जिससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है.
 4. गायों को चावल, गुड़ और रोटी खिलाएं.
 5. इस विशेष दिन चींटियों और कौवों को भोजन कराना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है.
 6. कई लोग अपने घर पर ब्राह्मणों को आमंत्रित करते हैं और उन्हें सात्विक भोजन कराते हैं.
7. इस दिन ब्राह्मणों को वस्त्र, जूते और दक्षिणा भी भेंट करते हैं.
8. पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और उसमें काले तिल व उड़द की दाल डालना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है.
 9. घर पर पितृ तर्पण या पितृ शांति पूजा करवाने के लिए किसी पुरोहित (पंडित) को आमंत्रित करें.
10. पूजा के दौरान पूरा ध्यान लगाएं, यह विधि-विधान की सफलता के लिए बहुत ही जरूरी है.

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