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कौन हैं रूबल नागी? झुग्गियों की बदली तस्वीर, ग्लोबल टीचर प्राइज जीतकर बनीं करोड़पति

Who is Rouble Nagi: एक ऐसा देश जहां लाखों बच्चे अभी भी स्कूल तक नही पहुंच पाए है. इस बीच वहां एक टीचर ने सड़कों, झुग्गियों और दीवारों को क्लासरूम में बदल दिया है. इसी कड़ी मेहनत और विजन का नतीजा है कि रूबल नागी दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रही है.

By: Mohammad Nematullah | Published: February 19, 2026 4:16:13 PM IST



Who is Rouble Nagi: एक ऐसा देश जहां लाखों बच्चे अभी भी स्कूल तक नही पहुंच पाए है. इस बीच वहां एक टीचर ने सड़कों, झुग्गियों और दीवारों को क्लासरूम में बदल दिया है. इसी कड़ी मेहनत और विजन का नतीजा है कि रूबल नागी दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रही है. 5 फरवरी को उन्हें शिक्षा में उनके शानदार योगदान के लिए GEMS एजुकेशन ग्लोबल टीचर प्राइज से सम्मानित किया गया है. उन्हें लगभग $1 मिलियन (लगभग 8 करोड़ रुपये) की इनामी राशि मिली है. दुबई में हुए समारोह में रूबल नागी को हज़ारों नॉमिनेशन में से बेस्ट टीचर चुना गया है.

कौन हैं रूबल नागी?

रूबल नागी सिर्फ एक टीचर ही नही बल्कि एक आर्टिस्ट और सोशल वर्कर भी है. उन्होंने रूबल नागी आर्ट फ़ाउंडेशन की स्थापना की है. जो उत्तर प्रदेश के झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा देने के लिए समर्पित एक फ़ाउंडेशन है. उनका मानना ​​है कि अगर कोई बच्चा स्कूल नहीं जा सकता, तो स्कूल को उन तक पहुंचना चाहिए.

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दीवारें क्लासरूम बन गईं

रूबल नागी ने शिक्षा के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है. उन्होंने झुग्गी-झोपड़ियों और बस्तियों की दीवारों पर अल्फाबेट, मैथ, साइंस और हिस्ट्री पेंट की है. बच्चों को खेल-खेल में सीखने में मदद करने के लिए उन्होंने दीवार को सीखने का जरिया बना दिया है.

अब तक 800 से ज़्यादा लर्निंग सेंटर

रूबल नागी ने पूरे देश में 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर बनाए है. यह सेंटर पिछड़े समुदायों और गरीब बच्चों को फ्री शिक्षा देती है. वह साफ कहती है कि शिक्षा किसी का खास अधिकार नही बल्कि सारे बच्चों का अधिकार है. उनकी प्रयास ने कई बच्चों की जिंदगी बदल दी है. जो बच्चे कभी स्कूल का नाम सुनते ही डर जाता था. अब वे बच्चे कॉन्फिडेंस के साथ पढ़ रहे, और अपने भविष्य के सपने देख रहे है. 

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सोशल मीडिया पर जाहिर की खुशी

ग्लोबल टीचर प्राइज मिलने के बाद रूबल नागी की खुशी सोशल मीडिया पर भी दिखी है. उन्होंने इस कामयाबी को सिर्फ़ अपनी ही नहीं, बल्कि उन सभी बच्चों और टीचरों की जीत बताया जो कम रिसोर्स के बावजूद शिक्षा के बारे में बात फैला रहे है.

हर टीचर के लिए एक प्रेरणा

रूबल नागी की कहानी दिखाती है कि एक इंसान का विजन और कड़ी मेहनत समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है. आर्ट के जरिए शिक्षा देने के उनके तरीके ने उन्हें दुनिया के सबसे बड़े टीचर अवॉर्ड तक पहुंचाया है. उनकी यह कामयाबी सिर्फ़ एक सम्मान नहीं है, बल्कि इस बात का सबूत है कि पक्के इरादे से झुग्गी-झोपड़ी की दीवारें भी बच्चों के सपनों की नींव बन सकती है.

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