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Mojtaba Khamenei: मोजतबा नहीं थे अली खामेनेई की पहली पसंद! फिर आखिर कैसे बन गए सुप्रीम लीडर, रिपोर्ट्स में हुआ बड़ा खुलासा

Mojtaba Khamenei: 28 फरवरी को इज़राइल-US हमलों में अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद मोजतबा खामेनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर के तौर पर सत्ता संभाल रहे हैं. रिपोर्टों से पता चला है कि मोजतबा कभी भी इस पद के लिए अपने पिता की पसंद नहीं थे,

By: Heena Khan | Published: March 11, 2026 12:42:22 PM IST



Mojtaba Khamenei: 28 फरवरी को इज़राइल-US हमलों में अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद मोजतबा खामेनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर के तौर पर सत्ता संभाल रहे हैं. रिपोर्टों से पता चला है कि मोजतबा कभी भी इस पद के लिए अपने पिता की पसंद नहीं थे, इतना ही नहीं, उनका नाम उनकी वसीयत में भी नहीं था. न्यूयॉर्क पोस्ट ने ईरानी इंटेलिजेंस से जुड़े विपक्षी ग्रुप नेशनल यूनियन फॉर डेमोक्रेसी के रिसर्च डायरेक्टर खोसरो इस्फ़हानी के हवाले से कहा, “खामेनेई ने अपनी वसीयत में साफ तौर पर मोजतबा को उत्तराधिकारी के तौर पर नाम न देने के लिए कहा था.”

मोजतबा खामेनेई के IRGC से संबंध 

56 साल के मोजतबा को 8 मार्च को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया था, उनके पिता की हत्या के एक हफ़्ते से ज़्यादा समय बाद, जिन्होंने लगभग 37 सालों तक देश पर सख्ती से राज किया था. खबर है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ काफी जुड़े हुए हैं, जो ईरान के सबसे ताकतवर मिलिट्री और इकोनॉमिक ऑर्गनाइज़ेशन में से एक है. IRGC ने मोजतबा की पूरी बात मानने का वादा किया है, जिन्होंने चुने जाने के बाद से अभी तक पब्लिक में कुछ नहीं कहा है. ईरान के नए लीडर ने कभी ऑफिस के लिए चुनाव नहीं लड़ा और न ही उन पर पब्लिक वोटिंग हुई, हालांकि वे सुप्रीम लीडर के करीबी लोगों में एक अहम इंसान रहे हैं.

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क्या मोजतबा बने सबकी सहमति से लीडर 

असल में, ईरान के सबसे ताकतवर पोस्ट पर मोजतबा के आने को IRGC का सपोर्ट मिला था, जो मोजतबा को अपने पिता का ज़्यादा नरम वर्शन मानता है, जो प्रैक्टिकल लोगों की चिंताओं को नज़रअंदाज़ करते हुए उनकी हार्डलाइन पॉलिसी का सपोर्ट करेंगे, रॉयटर्स ने सीनियर ईरानी सोर्स के हवाले से कहा.
क्या ईरान के सुप्रीम लीडर के तौर पर मोजतबा के नाम पर ईरानी एडमिनिस्ट्रेशन के अंदर कोई विरोध था? रॉयटर्स ने बताया कि सीनियर पॉलिटिकल और मौलवी लोगों के विरोध की वजह से उन्हें टॉप लीडर चुने जाने के अनाउंसमेंट में घंटों की देरी हुई. ईरान में गुमनाम सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि मोजतबा के चुनाव से ‘विदेश में ज़्यादा आक्रामक रुख और अंदरूनी दमन’ हो सकता है.

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