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आज जो दे रहा यूक्रेन के खिलाफ पुतिन का साथ, उसी ने मॉस्को में बिछा दी थी सैकड़ों रूसी लोगों की लाश; जाने क्या था वो कांड?

Chechen Militants Hostage: विद्रोहियों की मुख्य मांग थी कि रूस अपनी सेना को तत्काल चेचन्या से वापस बुलाए, अन्यथा वे बंधकों की हत्या शुरू कर देंगे.

Published by Shubahm Srivastava

Moscow Theatre Hostage Crisis: रूस-यूक्रेन के बीच चल रही जंग को 3 साल से ज्यादा का समय हो चुका है. दोनों ही देशों को भारी जान और माल का नुकसान हुआ. इसके बाद भी अभी तक जंग खत्म करवाने को लेकर आपसी सहमति नहीं बन पाई है. इस जंग में रूसी सेना के साथ मिलकर चेचेन लड़ाके भी यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि जो लोग आज इस जंग में रूस का साथ दे रहे हैं. एक समय उन्हीं लोगों ने मॉस्को में सैकड़ों की संख्या में लाशें बिछा दी थी. 

असल में 23 अक्टूबर 2002 को रूस की राजधानी मॉस्को के दुब्रोवका थिएटर में हुए आतंकी हमले ने पूरे विश्व को झकझोर दिया. बता दें कि उस दिन करीब 50 हथियारबंद चेचेन विद्रोहियों ने थिएटर में हमला कर दिया और 850 लोगों को बंधक बना लिया था. लेकिन जल्द ही गोलियों की आवाज और अफरातफरी ने भयावह स्थिति पैदा कर दी.

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चेचेन विद्रोहियों में शामिल थी महिलाएं

इन चेचेन विद्रोहियों में लगभग एक-तिहाई महिलाएं थीं. बाद में रूसी सुरक्षा एजेंसी एफएसबी ने खुलासा किया कि ये महिलाएं वे थीं जिनके पति या भाई रूस-चेचन युद्ध में मारे गए थे. विद्रोहियों की मुख्य मांग थी कि रूस अपनी सेना को तत्काल चेचन्या से वापस बुलाए, अन्यथा वे बंधकों की हत्या शुरू कर देंगे. स्थिति भयावह तब हो गई जब उन्होंने एक युवती को गोली मार दी और चेतावनी दी कि यदि रूसी सेना ने हमला किया तो एक विद्रोही के बदले 10 बंधकों की हत्या कर दी जाएगी.

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विद्रोहियों ने कुछ बंधकों को रिहा किया — जिनमें विदेशी नागरिक, महिलाएं और बच्चे शामिल थे — ताकि उनके माध्यम से रूसी सरकार तक संदेश पहुंच सके. घटना ने पूरे रूस में सनसनी फैला दी. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर हालात पर नजर रखी. दूसरे दिन 39 और बंधकों को छोड़ा गया, लेकिन संकट गहराता गया.

पुतिन ने बनाया प्लान

रूसी सुरक्षा बलों ने रणनीति बनाई और फर्जी अफवाह फैलाई कि हमला सुबह 3 बजे होगा, जबकि असली समय 5 बजे रखा गया. इसके बाद कमांडो ने थिएटर के वेंटिलेशन सिस्टम से एक स्लीपिंग गैस छोड़ी, ताकि विद्रोही बेहोश हो जाएं. गैस के असर से अफरा-तफरी मच गई और कई विद्रोही कमजोर पड़ गए. सुबह 6 बजकर 33 मिनट पर करीब 200 रूसी कमांडो थिएटर में दाखिल हुए और सभी हमलावरों को मार गिराया.

हालांकि ऑपरेशन में कई बंधकों की भी मौत गैस के प्रभाव से हुई, लेकिन यह घटना रूस के इतिहास की सबसे जटिल बंधक स्थितियों में से एक बन गई.

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