Energy Lockdown In Pakistan: अलग-अलग हिस्सों में चल रही जंग के चलते दुनिया इस वक्त गहरे ऊर्जा संकट से गुजर रही है, जिसका असर सीधे आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है.मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और तेल-गैस सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने हालात को और बिगाड़ दिया है. भले ही अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी सीजफायर हुआ हो, लेकिन इसके बावजूद ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है.
यही कारण है कि कई देशों को अब पारंपरिक लॉकडाउन की तरह ‘एनर्जी लॉकडाउन’ जैसे सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं. इसका उद्देश्य बीमारी नहीं, बल्कि ईंधन और बिजली की खपत को नियंत्रित करना है.
पाकिस्तान में सख्ती: रात 8 बजे के बाद बाजार बंद
पाकिस्तान में ऊर्जा संकट ने गंभीर रूप ले लिया है. शहबाज शरीफ की सरकार ने ईंधन और बिजली बचाने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं.देश के ज्यादातर हिस्सों में बाजार और शॉपिंग मॉल को रात 8 बजे के बाद बंद करने का आदेश दिया गया है.सरकार का मानना है कि इससे बिजली की खपत कम होगी और ईंधन की बचत होगी.पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर बढ़ते कच्चे तेल के दामों ने भारी दबाव डाला है, जिससे नाइटलाइफ पर लगभग ब्रेक लग गया है और आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है.
स्मार्ट लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम की तैयारी
पाकिस्तान केवल बाजार बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि “स्मार्ट लॉकडाउन” की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है.इसके तहत स्कूलों को बंद करने और सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू करने की योजना बनाई जा रही है.इसका मुख्य उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करना है.अफगानिस्तान सीमा पर तनाव और घरेलू राजनीतिक अस्थिरता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है.महंगाई से परेशान जनता में असंतोष बढ़ रहा है, लेकिन सरकार के पास फिलहाल ऊर्जा बचाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं दिखाई दे रहा है.
श्रीलंका में अवकाश, फिलीपींस में ऊर्जा आपातकाल
श्रीलंका में हालात काफी नाजुक हैं. सरकार ने हर बुधवार को सरकारी अवकाश घोषित कर दिया है, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और बिजली की बचत हो सके. साथ ही, पेट्रोल की राशनिंग लागू कर दी गई है, जिससे एक व्यक्ति तय सीमा से ज्यादा ईंधन नहीं खरीद सकता. वहीं फिलीपींस ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है.
यह देश अपनी 98% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ता है. विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने के साथ-साथ बिजली उत्पादन के लिए गैस की कमी भी गंभीर समस्या बन गई है.
म्यांमार, बांग्लादेश और वियतनाम में सख्त नियंत्रण
म्यांमार में ईंधन बचाने के लिए ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू किया गया है, जिसके तहत वाहन नंबर के आधार पर ही सड़कों पर चल सकते हैं. बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती की जा रही है और स्कूलों में जल्दी छुट्टी के आदेश दिए गए हैं. वहीं वियतनाम में पेट्रोल की कीमतों में 50-60% तक की वृद्धि हुई है.इसके चलते गैर-जरूरी यात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह दी गई है.सरकार केवल जरूरी क्षेत्रों को ही ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है.
क्या है एनर्जी लॉकडाउन?
“एनर्जी लॉकडाउन” एक नई अवधारणा है, जिसमें ऊर्जा संसाधनों की भारी कमी होने पर सरकारें सख्त प्रतिबंध लागू करती हैं.इसमें स्कूलों और बाजारों को बंद करना, वर्क फ्रॉम होम लागू करना, यात्रा सीमित करना और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को नियंत्रित करना शामिल है.विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड आगे और बढ़ सकता है. जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.आने वाले समय में ऊर्जा संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जीवन पर और गहरा असर डाल सकता है.

