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डॉलर की बादशाहत अब होगी खत्म, भारत-रूस का बड़ा फैसला, रूबल के बजाए अब इस देश की करेंसी में तेल खरीदेगी नई दिल्ली!

Russian Crude Oil: रूसी उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने बुधवार को कहा कि भारत अब रूस से आयातित तेल के लिए कुछ भुगतान चीनी मुद्रा युआन में कर रहा है.

Published by Shubahm Srivastava

India Russia Oil Trade: भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार में एक नया आर्थिक कदम उठाया गया है. रूसी उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने बुधवार को कहा कि भारत अब रूस से आयातित तेल के लिए कुछ भुगतान चीनी मुद्रा युआन में कर रहा है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में अधिकांश भुगतान रूबल में किए जाते हैं. नोवाक के अनुसार, रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार लगातार बढ़ रहा है.

दोनों देशों के बीच रूबल का क्यों हो रहा इस्तेमाल?

पिछले दो वर्षों से, भारत रूस से तेल खरीद के लिए भारतीय रुपये में भुगतान कर रहा है. पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए डॉलर-आधारित प्रतिबंधों से बचने के लिए यह मॉडल अपनाया गया था. भारत ने भारतीय बैंकों के माध्यम से रुपया-रूबल लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए कई रूसी बैंकों को “विशेष वोस्ट्रो खाते” प्रदान किए हैं. इस व्यवस्था से रूस को रुपये में भुगतान प्राप्त करने की अनुमति मिली, लेकिन इससे व्यापार संतुलन में असंतुलन पैदा हो गया. भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, जबकि रूस उतना निर्यात नहीं करता. परिणामस्वरूप, रूस में रुपये जमा हो रहे थे, लेकिन उनका उपयोग मुश्किल था.

डॉलर पर निर्भरता होगी कम!

इस असंतुलन को देखते हुए, अब युआन में भुगतान का विकल्प अपनाया गया है. रूस अपने व्यापारिक नेटवर्क में युआन का आसानी से उपयोग कर सकता है, क्योंकि रूस और चीन के बीच व्यापार महत्वपूर्ण है. यह कदम न केवल व्यापार संतुलन को बेहतर बनाता है, बल्कि डॉलर पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण माना जाता है. भारत, रूस और चीन पिछले कुछ वर्षों से डॉलर-विमुक्तीकरण की दिशा में काम कर रहे हैं, और ब्रिक्स देशों के बीच एक साझा मुद्रा के संभावित विचार पर भी चर्चा चल रही है.

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रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता

विश्लेषकों का कहना है कि यह व्यवस्था भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, क्योंकि रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. इस वर्ष के पहले आठ महीनों में, भारत ने रूस से प्रतिदिन औसतन 16 लाख बैरल तेल खरीदा. इससे भारत को सस्ती ऊर्जा और रूस को युद्ध के बीच भी एक स्थिर खरीदार मिला. हालांकि, यह कदम अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंधों को जटिल बना सकता है.

संक्षेप में, भारत का यह निर्णय न केवल उसकी ऊर्जा और आर्थिक रणनीति का हिस्सा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर से दूर होकर बहु-मुद्रा व्यापार की ओर एक बड़े कदम का संकेत भी देता है. इस नए भुगतान मॉडल से दोनों देशों को लाभ होगा – भारत को सस्ती और स्थिर ऊर्जा मिलेगी, तथा रूस को अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अधिक लचीलापन मिलेगा.

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Shubahm Srivastava

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