UP Viral Video: हापुड़ के एक निजी अस्पताल के सर्जन एक आपातकालीन ऑपरेशन के दौरान उस समय दंग रह गए जब उन्होंने एक 40 वर्षीय मरीज़ के पेट से 29 स्टील के चम्मच, 19 टूथब्रश और दो नुकीले पेन निकाले. डॉक्टरों ने बताया कि उसे पेट में तेज़ दर्द की शिकायत होने लगी थी और उसकी हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल लाया गया था. अल्ट्रासाउंड में उसके पेट में कई धातु की वस्तुएं फंसी हुई दिखाई दीं, जिसके बाद तुरंत सर्जरी की गई. बता दें कि मरीज़ सचिन को उसके परिवार ने ग़ाज़ियाबाद के एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया था। सचिन का आरोप है कि उसे वहां बहुत कम खाना दिया जाता था. कभी सिर्फ़ दो-तीन रोटियां और थोड़ी सी सब्ज़ी, तो कभी सिर्फ़ एक बिस्किट इससे नाराज़ होकर उसने चम्मच और टूथब्रश जैसी चीज़ें निगलनी शुरू कर दीं.
अचानक पेट में तेज़ दर्द
मरीज ने स्वीकार किया कि वह केंद्र से चुपके से चम्मच और टूथब्रश ले लेता था, उन्हें बाथरूम में ले जाता था, तोड़ता था और पानी के साथ निगल जाता था. कई दिनों तक ऐसा करने के बाद, उसे अचानक पेट में तेज़ दर्द हुआ, जिसके बाद उसे हापुड़ के देवनंदिनी अस्पताल में भर्ती कराया गया.
डॉक्टर दंग रह गए
डॉ. श्याम कुमार ने बताया कि जब मरीज़ की अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे रिपोर्ट आई, तो उसमें धातु और प्लास्टिक की कई चीज़ें दिखाई दे रही थीं. शुरुआत में सोचा गया था कि इन्हें एंडोस्कोपी के ज़रिए निकाला जा सकता है लेकिन वस्तुओं की बड़ी संख्या और आकार के कारण यह संभव नहीं था. अंततः, मरीज़ की सर्जरी की गई और सभी वस्तुएं सफलतापूर्वक निकाल दी गईं. उन्होंने कहा कि रोगी को गुरुवार को छुट्टी दे दी गई. अब उसकी हालत स्थिर है और वह ठीक हो रहा है.
नशे के आदी सचिन के पेट से 29 स्टील चम्मच, 19 टूथब्रश, 2 नुकीले पेन सहित कुल 50 वस्तुएं निकली हैं। सचिन नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती था। वहां पेट दर्द हुआ। सीटी स्कैन में ये बात पता चली। 5 घंटे ऑपरेशन हुआ। डॉक्टरों का मानना है कि मानसिक बीमारी में कई बार इंसान बिना खाने योग्य चीजों… pic.twitter.com/1ANCYqiYw1
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) September 25, 2025
मनोवैज्ञानिक स्थिति से जुड़ा है मामला
डॉक्टरों ने बताया कि यह व्यवहार एक मनोवैज्ञानिक स्थिति से जुड़ा है जिसमें मरीज़ आवेग में आकर हानिकारक वस्तुएं निगल लेते हैं. बता दें कि मरीज़ शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं. उसने डॉक्टरों को बताया कि उसने घबराहट में ये वस्तुएं निगल ली थीं.
मरीज ने कहा “मेरा परिवार मुझे डॉक्टर के पास ले गया, लेकिन मुझे वहीं छोड़ गया.” उन्होंने कहा, “वहां मेरे साथ बुरा व्यवहार किया जाता था और अक्सर मुझे खाना नहीं दिया जाता था. मैं असहाय और क्रोधित महसूस करता था, इसलिए मैंने खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए चीजें निगलना शुरू कर दिया.
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इस तरह का मामला पहली बार सामने आया है
डॉ. कुमार ने कहा, “मैंने अपने जीवन में ऐसा मामला पहली बार देखा है। यह वाकई चौंकाने वाला है कि कोई गुस्से में इतना खतरनाक कदम उठा सकता है.