Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज, एक हिंदू तपस्वी और गुरु हैं, जो राधावल्लभ संप्रदाय को मानते हैं. प्रेमानंद जी महाराज अपनी भक्ति, सरल जीवन, और मधुर कथाओं के लिए लोगों में काफी प्रसिद्ध हैं. हर रोज लोग उनके कार्यक्रम में शामिल होते हैं जहां वह लोगों के सवालों के जवाब देते हैं.हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं. उनके प्रवचन, जो दिल को छू जाते हैं, ने उन्हें बच्चों और युवाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया है. प्रेमानंद जी महाराज नाम जप करने के लिए के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं और साफ मन से अपने काम को करें और सच्चा भाव रखें.
भक्त के सवाल पर प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि दुख आने पर साधक को कैसे भावना रखनी चाहिए.
पति का हाथ शादी के समय नीचे होता है और पत्नी का हाथ ऊपर, इसे ‘पाणिग्रहण संस्कार’ (Panigrahan Sanskar) कहते हैं, इसका अर्थ है आज से मैं आपका सारा भार लेता हूं, यदि पत्नी जप, जप, नियम, संयम आदि कर रही है और पति मनमाने आचरण कर रहा है तो पति की दुर्गति होगी और पत्नी को परम कल्याण होगा. यदि पत्नी पति की आज्ञा का पालन करती है, पति की सेवा में रहती है और कोई तप भजन नहीं है और पति उसका भजन करता है तो पत्नी का कल्याण हो जाएगा. पति की उपासना मात्र से पत्नी का कल्याण हो जाएगा.
अगर पति तीर्थ गया है और पत्नी से सारी तैयारी कर दी है, पति जब तीर्थ यात्रा करके आएंगे तो पत्नी को आधा फल स्वंय मिल जाएगा, लेकिन पत्नी अगर तीर्थ गई है तो पति को इसका लाभ नहीं मिलेगा. यह धर्म शास्त्रों का निर्णय है.
पत्नी ने अपना जीवन दे दिया, पति अपना घर नहीं छोड़ता वो अपना घर छोड़ कर आती है आपके परिवार के साथ, आपके साथ अपनी नई जीवन यात्रा शुरू करने, तन, मन,सुख सब कुछ आपके लिए त्याग करके ‘पाणिग्रहण करके लग गई, इसीलिए सारा भार आपको लेना पड़ेगा.
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