क्यों खास है छठ पूजा? जानिए इस महापर्व से जुड़ी 10 अनसुनी बातें!

Chhath Puja बिहार की पवित्र धरती से जुड़ा ऐसा महापर्व है जिसमें आस्था, अनुशासन और विज्ञान का अनोखा संगम देखने को मिलता है. जानिए छठ पूजा से जुड़ी 10 अनसुनी बातें, जो इस पर्व को और भी खास बनाती हैं.

Published by Shivani Singh

छठ पूजा सिर्फ़ एक पर्व नहीं, बल्कि भारत की मिट्टी से जुड़ी सबसे प्राचीन और पवित्र परंपराओं में से एक है. इसकी शुरुआत बिहार की पावन धरती से हुई थी जहाँ गंगा, कोसी और सोन नदियों के घाटों पर लाखों लोग हर साल सूर्य देव और छठी मइया की आराधना करते हैं. धीरे-धीरे यह आस्था सीमाओं से निकलकर पूरे भारत और दुनिया तक फैल गई, लेकिन इसका हृदय अब भी बिहार की मिट्टी में धड़कता है.चार दिन तक चलने वाला यह पर्व केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि अनुशासन, शुद्धता और निस्वार्थ भक्ति का प्रतीक है लेकिन क्या आप जानते हैं, छठ पूजा से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं? ऐसे रहस्य, मान्यताएँ और परंपराएँ, जो इस त्योहार को और भी दिव्य बना देते हैं.

आइए जानते हैं छठ पूजा से जुड़ी वो 10 अनसुनी बातें, जो आपकी श्रद्धा को और गहरा कर देंगी…

1. वेदों में भी मिलता है छठ पूजा का उल्लेख 

माना जाता है कि छठ पूजा की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है. ऋग्वेद में सूर्य उपासना और अर्घ्य देने की प्रथा का उल्लेख मिलता है, जो इस पर्व से जुड़ा माना जाता है. कहा यह भी जाता है कि सबसे पहले माता सीता ने छठ पूजा जैसा कठिन व्रत किया था.

2. सूर्य देव की बहन की पूजा की जाती है

बहुत कम लोग जानते हैं कि छठ पूजा में सिर्फ़ सूर्य देव ही नहीं, बल्कि उनकी बहन छठी मइया (उषा देवी) की भी आराधना की जाती है, जिन्हें संतान और स्वास्थ्य की देवी माना जाता है

3. यह भारत का एकमात्र त्योहार है जहाँ डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है

अधिकतर पर्वों में उगते सूर्य की पूजा होती है, लेकिन छठ में पहले डूबते सूरज को और फिर उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है. जो जीवन के उतार-चढ़ाव दोनों को समान सम्मान देने का प्रतीक है.

4. बिना पुजारी के पूरा होता है ये व्रत

छठ पूजा एक ऐसा अनोखा पर्व है जिसे पूरी तरह स्वयं भक्त ही करते हैं. इसमें किसी ब्राह्मण या पुजारी की आवश्यकता नहीं होती है. यही इसे सबसे आत्मिक और लोकपर्व बनाता है.

5. इस व्रत में बोलना भी वर्जित होता है

छठ व्रती कई बार पूजा के दौरान मौन व्रत रखते हैं. माना जाता है कि मौन साधना से मन और आत्मा की शुद्धि होती है और मां छठी मइया प्रसन्न होती हैं.

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6. प्रसाद में बनने वाला ठेकुआ सिर्फ़ स्वाद नहीं, प्रतीक है

छठ पूजा में प्रसाद के तौर पर बनने वाले ठेकुआ में गेहूं का आटा, गुड़ और घी होता है. ये तीनों चीज़ें पवित्रता, सेहत और मिठास का प्रतीक हैं. इसे छठ का सबसे पवित्र प्रसाद माना जाता है.

7. वैज्ञानिक दृष्टि से भी है खास

छठ पूजा के दौरान सूर्य की सीधी किरणें शरीर पर पड़ती हैं, जिससे विटामिन D की मात्रा बढ़ती है और शरीर डिटॉक्स होता है. यही कारण है कि इसे नेचुरल एनर्जी फेस्टिवल भी कहा जाता है.

8. छठ पूजा में पानी में खड़े रहने का है गहरा अर्थ

नदी या तालाब में खड़े होकर अर्घ्य देने से शरीर का संतुलन और मन की एकाग्रता बढ़ती है. यह योग की मुद्रा ‘प्राणायाम’ का प्रतीक माना जाता है.

9. छठ केवल बिहार का पर्व नहीं

छठ जैसे महापर्व की जड़ें बिहार में हैं, पर आज यह पर्व भारत से लेकर नेपाल, मॉरिशस, फिजी और अमेरिका तक मनाया जाता है. यह भारतीय प्रवासियों की आस्था का वैश्विक प्रतीक बन चुका है.

10. छठ पूजा का पहला अर्घ्य हमेशा माताओं द्वारा ही दिया जाता है

छठ पूजा मुख्य रूप से संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना से जुड़ा व्रत है. परंपरागत रूप से, घर की माताएं या बड़ी महिलाएँ इस व्रत को रखती हैं और पहला अर्घ्य (पहली बार सूर्य को जल अर्पित करना) अपने हाथों से देती हैं.

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Shivani Singh

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