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Chaitra Navratri 2026: कन्या पूजन में लड़के को बैठाना क्यों है जरूरी? यहां जानें लांगुर का महत्व

Chaitra Navratri 2026: अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन (कंजक पूजन) का विशेष महत्व माना जाता है, जिसमें नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ रूपों का साक्षात स्वरूप मानकर पूजा जाता है. कन्या में एक छोटे लड़के का शामिल होना जरूरी माना जाता है.

By: Preeti Rajput | Published: March 22, 2026 1:21:07 PM IST



Chaitra Navratri 2026: हिंदू पर्व में नवरात्रि बड़े त्योहारों में से एक मानी जाती है. साल में 4 बार नवरात्रि का पर्व आता है. जिसमें चैत्र और सर्दियों नवरात्रि का पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है. इस त्योहार पर मां दुर्गा के 9 रूपों की नौ दिन पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन भी किया जाता है. 

नवरात्रि में कन्या पूजन 

अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन (कंजक पूजन) का विशेष महत्व माना जाता है, जिसमें नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ रूपों (नवदुर्गा) का साक्षात स्वरूप मानकर उनकी पूजा, पैर धुलाई, भोजन और दक्षिणा दी जाती है. इस दौरान कन्याओं के साथ एक छोटे लड़के को भी बैठाया जाता है. जिसे लंगूर’, ‘लंगूरिया’ या ‘बटुक’ कहा जाता है. 

क्यों किया जाता है लड़के का पूजन?

बाबा भैरव का प्रतीक 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने माता दुर्गा की रक्षा के लिए ‘भैरव’ का रूप धारण किया था. माता दुर्गा ने भैरव को यह वरदान दिया था कि जो भी भक्त मेरी पूजा करेगा, वह जब तक भैरव की पूजा नहीं करता, तब तक मेरी पूजा भी अधूरी मानी जाएगी. इसलिए कन्याओं के साथ एक लड़के को भैरव का रुप मानकर पूजा जाता है. ताकी पूजा समर्पण हो सकें.

नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा

लंगूर (बाल भैरव) को शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने वाला माना जाता है. कन्याओं की सुरक्षा और घर में सुख-समृद्धि के लिए उनकी पूजा करना अनिवार्य माना जाता है. जिससे देवी की कृपा के साथ भगवान शिव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है. 

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नवदुर्गा और बटुक भैरव का संबंध

कन्या पूजन में नौ कन्याएं नवदुर्गा का रुप मानी जाती है. वहीं लंगूर भैरव का स्वरूप माना जाता है. यह अनुष्ठान शक्ति और शिव के मिलन का प्रतीक है. बिना बटुक के कन्या पूजन पूरा नहीं माना जाता है. 

परंपरा और मान्यता

हिंदू संस्कृति में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. माता वैष्णो देवी की पूजा में भी भैरवनाथ की पूजा का विशेष विधान है. इस परंपरा के तहत चैत्र नवकात्रि में कन्याओं के साथ एक लंगूर को भी भोजन कराया जाता है. 

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