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Period Cramps: पहले दिन ज्यादा, बाद में कम, डॉक्टर ने बताया पीरियड्स पेन का असली कारण?

Period Cramps: सभी लड़कियों ने नोटिस किया होगा कि पीरियड्स का दर्द पहले दिन ज्यादा और तीसरे दिन धीरे-धीरे कम क्यों हो जाता है. शरीर थोड़ा सामान्य महसूस करने लगता है.

By: Preeti Rajput | Published: March 2, 2026 8:51:56 AM IST



Period Cramps: कई महिलाओं के लिए पहले दिन का पीरियड्स का दर्द झेलने काफी मुश्किल हो जाता है. अचानक से पेट के निचले हिस्से में दर्द काफी तेज हो जाता है. शरीर एकदम भारी-भारी सा लगने लगता है. कमर और जांघों में दर्ज, जी का मचलना और दस्त जैसी दिक्कत भी हो जाती है. ऐसे में रोज के साधारण काम ऑफिस जाना, पढ़ाई करना या घर का काम करना बेहद कठिन लगने लगता है. लेकिन आपने नोटिस किया होगा कि पहले दिन ज्यादा और दूसरे-तीसरे दिन धीरे-धीरे कम होने लगता है. तब पेट में हो रही ऐंठन सहने लायक हो जाती है. शरीर थोड़ा सामान्य सा महसूस होने लगता है. ऐसे में आपके मन में सवाल आता होगा कि आखिर ऐसा क्यों होता है?  तो आइए जानते हैं कि पीरियड्स पेन पहले दिन ज्यादा और बाद में कम आखिर ऐसा क्यों होता है? 

पहले दिन क्यों ज्यादा होता है दर्द?

दिल्ली के सीके बिरला अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की निदेशक डॉ. कीर्ति खेतान और रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. साक्षी गोयल ने इस पर जानकारी दी है. पीरियड्य के पहले दिन शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन नामक रसायन का स्तर काफी अधिक हो जाता है. यह रसायन यूट्रस को सिकुड़ने में मदद करता है. ताकि वह अपनी परत बाहर निकाल सके. पहले 24 से 48 घंटों में यूट्रस की ज्यादातर परत बाहर निकल जाती है. इसके बाद प्रोस्टाग्लैंडिन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है. इसलिए दर्द भी धीरे-धीरे कम हो जाता है. 

डॉक्टर्स ने बताई सच्चाई 

जब यूट्स बार-बार जोर से सिकुड़ता है, तो आसपास की ब्लड वेसल्स थोड़ी देर के लिए जब जाती है. जिसके कारण यूट्रस की मांसपेशियों तक खून और ऑक्सीजन कम होने लगता है. जहां पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो वहां तेज और ऐंठन जैसा दर्द होने लगता है. इसी वजह से पहले दिन का दर्द धड़कन जैसा तीखा दर्द महसूस होता है. जैसे-जैसे ऐंठन कम होते हैं, खून का प्रवाह सामान्य होने लगता है. 

ब्लीडिंग मतलब ज्यादा ऐंठन

पीरियड्स के पहले और दूसरे दिन ब्लीडिंग सबसे ज्यादा होती है. क्योंकि पहले दिन ही खून और ऊतक बाहर निकालने होते हैं, तो यूट्रस को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है. वहीं चौथे दिन ब्लीडिंग कम हो जाती है. जब निकालने के लिए ज्यादा परत नहीं बचती है, तो यूट्स को उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती. इससे आराम मिलता है, कम उम्र की लड़कियों में सर्विक्स का छिद्र थोड़ा संकरा हो जाता है. जब खून इस छोटे रास्ते से बाहर निकलता है. तो पहले एक,दो दिन दबाव ज्यादा महसूस हो सकता है. जैसे-जैसे फ्लो कम होता है, यह दबाव भी कम हो जाता है. दर्द भी धीरे-धीरे घटने लगता है. 

उल्टी या बेहोशी 

हल्का दर्द होना आम बात है, लेकिन अगर दर्द बहुत ज्यादा हो, तो नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टर से सलाह लें, अगर दर्द इतना तेज हो कि उल्टी या बेहोशी होने लगती है. हर साल दर्द बढ़ता जा रहा है. दर्द निवारक दवा से भी आराम न मिले या पीरियड्स के बीच में भी दर्द होता है. ऐसे में एडिनोमायोसिस या फाइब्रॉएड जैसी समस्याएं हो सकती हैं,  जिसका इलाज काफी ज्यादा जरूरी होता है. 

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पहले दिन पाए राहत 

  • पेट के निचले हिस्से पर हीटिंग पैड रखें.
  • दर्द निवारक दवा समय पर लें.
  • हल्की स्ट्रेचिंग या धीमी वॉक करें.
  • खूब पानी पिएं और अपने पीरियड्स का कैलेंडर बनाए रखें.
  • बैलेंस डाइट और स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाना भी जरूरी. 

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