Kajol Workout: काजोल की तरह आप भी रहना चाहती हैं स्लिम, तो रोजाना करें ये वाला वर्कआउट..!

51 साल की काजोल पिलाटेस रिफॉर्मर पर वर्कआउट कर रही हैं, लेकिन ये सिर्फ फिटनेस नहीं है. हर मूवमेंट में छिपा है बैलेंस, ताकत और उम्र के साथ सेफ रहने का राज.

Published by sanskritij jaipuria

Kajol Workout Tips:  बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल अपनी फिटनेस को लेकर अक्सर चर्चे में रहती हैं. हाल ही में पिलाटेस ट्रेनर नम्रता पुरोहित ने एक्ट्रेस काजोल को अपने स्टूडियो में पिलाटेस रिफॉर्मर पर वर्कआउट करते हुए शेयर किया. तस्वीरों के साथ नम्रता ने मजाक में लिखा, “पता नहीं आपको दिख रहा है या नहीं… लेकिन हम हमेशा स्प्लिट्स में ही रहते हैं.”

51 साल की काजोल इन तस्वीरों में रिफॉर्मर स्प्लिट स्क्वाट या स्कूटर वेरिएशन्स, मूविंग कैरिज पर कुछ सपोर्टेड लंजेस और स्ट्रैप्स का उपयोग करके स्टैंडिंग आर्म पुल्स करती दिख रही हैं.

पिलाटेस रिफॉर्मर के फायदे

फिटनेस एक्सपर्ट और कंसल्टेंट डायटिशियन गरिमा गोयल के अनुसार, “ये मूवमेंट्स बैलेंस, कोऑर्डिनेशन और कोर कंट्रोल को चुनौती देते हैं, साथ ही पैर, हिप्स, हाथ और पीठ को मजबूत करते हैं. हर स्लो ग्लाइड के दौरान फोकस और स्टेबिलिटी की जरूरत होती है, जो इसे साधारण दिखने के बावजूद एक प्रभावी फुल-बॉडी वर्कआउट बनाता है.”

रिफॉर्मर पिलाटेस शरीर की जागरूकता और कंट्रोल पर जोर देता है, केवल ताकत या इंटेंसिटी पर नहीं. गोयल कहती हैं, “रिफॉर्मर पिलाटेस में धीमी और सटीक मूवमेंट्स होती हैं जो कोर स्ट्रेंथ बढ़ाती हैं, पोस्चर सुधारती हैं और मसल्स की सहनशक्ति बढ़ाती हैं.”

50 के बाद पिलाटेस की अहमियत

50 के दशक में शरीर को ताकत की जरूरत होती है, लेकिन अत्यधिक स्ट्रेन से बचाना भी जरूरी है. गरिमा गोयल बताती हैं, “पिलाटेस मसल्स को मजबूत करता है और जोड़ों की सुरक्षा करता है. ये हिप और नी की स्टेबिलिटी सुधारता है और बैलेंस को तेज करता है, जो उम्र के साथ बहुत जरूरी हो जाता है. रिफॉर्मर का कंट्रोल्ड रेजिस्टेंस शरीर को सुरक्षित तरीके से मूव करने में मदद करता है और लंबे समय से बनी मसल इम्बैलेंस को ठीक करता है.”

पिलाटेस शरीर को थकने पर मजबूर करने के बजाय इसे बेहतर तरीके से मूव करना, सही पोस्चर में खड़ा होना और अंदर से सपोर्ट महसूस करना सिखाता है.

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 उम्र बढ़ने के साथ पिलाटेस

पिलाटेस सिर्फ फिटनेस तक सीमित नहीं है, ये लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत रहने में मदद करता है. गोयल कहती हैं, “मजबूत कोर मसल्स पोस्चर सुधारते हैं और पीठ दर्द कम करते हैं, फ्लेक्सिबल हिप्स और पैर रोजमर्रा की गतिविधियों को आसान बनाते हैं और बढ़ी हुई बॉडी अवेयरनेस चोट और गिरने के जोखिम को कम करती है. पिलाटेस का माइंडफुल तरीका नर्वस सिस्टम को एक्टिव रखता है, जिससे मूवमेंट में कॉन्फिडेंस और कोऑर्डिनेशन बढ़ता है.”

माइंडफुल मूवमेंट और जीवनशैली

पिलाटेस शरीर की सुनने, सीमाओं को समझने और इरादे के साथ मूव करने की आदत को बढ़ावा देता है. गोयल के अनुसार, “यह जागरूकता वर्कआउट के बाहर भी हमारे रोजमर्रा के व्यवहार और जीवनशैली पर असर डालती है. इस तरह के माइंड-बॉडी कनेक्शन से स्ट्रेस कम होता है, फोकस बढ़ता है और स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने में मदद मिलती है.”

पिलाटेस के साथ पोषण

गरिमा गोयल ने बताया, “पिलाटेस वर्कआउट के साथ हल्का और संतुलित आहार ऊर्जा बनाए रखता है, सही हाइड्रेशन और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन मसल्स की रिकवरी और स्वास्थ्य के लिए मदद करता है।”

 

sanskritij jaipuria

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