Women Reservation Bill: बजट सत्र का विस्तार करते हुए सरकार ने तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया है. इस सत्र की शुरूआत 16 अप्रैल गुरूवार को हुई थी. इस सत्र में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए हैं. जिनपर मतदान होना था.
महिला आरक्षण विधेयक पर हुआ मतदान
लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने मतदान का प्रस्ताव रखा है. कुल 489 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया. बिल के पक्ष में 278 वोट पड़े, वहीं विरोध में 211 वोट डाले गए. यानी 50 प्रतिशत आबादी की उम्मीद को बड़ा झटका लगा है. बिल गिरने के बाद लोकसभी स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि ‘कुल मत 528 पड़े हैं, जिनमें से पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े. पहले राउंड में कुल 489 वोट पड़े थे. जिनमें से पक्ष में 278 और खिलाफ में 211 वोट पड़े थे. इस बिल को पास होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “संविधान संशोधन(131वां संशोधन) बिल पास नहीं हुआ, सदन में वोटिंग के दौरान इसे 2/3 बहुमत नहीं मिला।” https://t.co/fP2v00da6c pic.twitter.com/tk6ByCKT08
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 17, 2026
क्या बोले अखिलेश यादव?
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, ‘हमने अपना पक्ष साफ रखा है. हम महिला आरक्षण के पक्ष में है, महिलाओं को आरक्षण मिले, उन्हें सुरक्षा मिले, उनका सम्मान बढ़े, लोकतंत्र में जो उनको स्थान मिलना चाहिए, हम उसके पक्ष में हैं. समाजवादी पार्टी या विपक्ष ने महिला आरक्षण को लेकर विरोध नहीं किया लेकिन उसके साथ ये जो महिलाओं के अधिकारों का हरण करना चाहते थे, विपक्ष ने ऐसी लक्ष्मण रेखा खींची कि वे उस लक्ष्मण रेखा के पार नहीं आ पाए.’
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क्या बोले केंद्रिय मंत्री?
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, कांग्रेस, INDI गठबंधन ने जिस तरह महिला आरक्षण बिल को गिराने का काम किया, वह देश की जनता, नारी शक्ति ने देखा और उनके चेहरे को भी देखा है. आने वाले दिनों में इन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.