Categories: देश

पैसा कहां से आएगा? फ्रीबीज बांटने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्त नाराजगी; SC ने तमिलनाडु सरकार को थमाया नोटिस

Supreme Court on Freebies: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव जीतने के लिए पॉलिटिकल पार्टियों के फ्रीबीज बांटने के बढ़ते ट्रेंड पर गंभीर चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि इस तरह की फ्रीबीज देश के इकोनॉमिक डेवलपमेंट में बड़ी रुकावट बन रही है.

Published by Mohammad Nematullah

Supreme Court on Freebies: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव जीतने के लिए पॉलिटिकल पार्टियों के फ्रीबीज बांटने के बढ़ते ट्रेंड पर गंभीर चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि इस तरह की फ्रीबीज देश के इकोनॉमिक डेवलपमेंट में बड़ी रुकावट बन रही है. कोर्ट ने इस मुद्दे को एक गंभीर इकोनॉमिक और डेमोक्रेटिक समस्या बताया है. कोर्ट के मुताबिक पॉलिटिकल पार्टियां बिना किसी ठोस इकोनॉमिक प्लान के चुनावों के दौरान लोकलुभावन वादे करती है. इसका असर सरकारी खजाने पर पड़ता है. जब सरकारी बजट इन फ्रीबीज पर खर्च हो जाता है, तो इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ और एजुकेशन जैसे जरूरी सेक्टर के डेवलपमेंट के लिए कोई पैसा नहीं बचता है. आखिर में नुकसान टैक्सपेयर को उठाना पड़ता है.

इलेक्शन कमीशन की भूमिका पर सवाल

इस केस की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सिर्फ पॉलिटिकल पार्टियों को दोष देना काफी नहीं है. इस प्रैक्टिस को रोकने के लिए एक साफ पॉलिसी की जरूरत है. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि इलेक्शन कमीशन और केंद्र सरकार को मिलकर इस “फ्रीबीज कल्चर” को कंट्रोल करने के लिए पूरी गाइडलाइंस बनानी चाहिए.

HPBOSE LDR exam 2026: एलडीआर परीक्षा से पहले बड़ा झटका, 97 आवेदन हुए रद्द; जानें कब है परीक्षा?

डेवलपमेंट बनाम लोकलुभावन पॉलिसी

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने देश में एक बड़ी बहस छेड़ दी है. कोर्ट का मानना ​​है कि जनता को मजबूत बनाने और मुफ़्त चीज़ें देकर उन्हें निर्भर बनाने में काफ़ी फर्क है. असली आर्थिक विकास तब होता है जब रोजगार के मौके बनते है और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता है, न कि तब जब सिर्फ़ चुनाव जीतने के लिए सरकारी खजाना खाली कर दिया जाता है. यह कमेंट देश की पॉलिटिक्स में बड़े बदलाव ला सकता है.

Related Post

चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के अगले कदम पर सबकी नजरें

अब इस मामले में सबकी नजरें चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के अगले कदम पर है. यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों के मैनिफ़ेस्टो में मुफ़्त चीज़ों को लेकर कोई सख़्त नियम लागू करता है या नहीं? कोर्ट ने एक एक्सपर्ट कमिटी बनाने का भी सुझाव दिया है जो पूरे मामले की स्टडी करेगी और अपनी रिपोर्ट देगी.

“वेलफेयर स्टेट” बनाम “फ्रीबीज” बहस

इस खबर का सबसे बड़ा साइड एंगल “वेलफेयर स्टेट” बनाम “फ्रीबीज” बहस है. भारत जैसे डेवलपिंग देश में जहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा गरीबी रेखा से नीचे रहता है, शिक्षा, राशन और हेल्थ जैसी सुविधाएं देना सरकार की ज़िम्मेदारी है. चुनौती यह तय करना है कि कौन सी स्कीम असली ‘वेलफेयर’ है और कौन सी सिर्फ़ वोट बैंक के लिए ‘रिश्वत’ है.

‘रमजान में गुनाहों से कैसे बचते हैं?’ पैपराजी के सवाल पर अली गोनी ने बताया अपना पूरा रूटीन!

Mohammad Nematullah

Recent Posts

2026 होंडा पासपोर्ट बनाम 2026 होंडा पायलट: कौन सी SUV आपके परिवार और रोमांच के लिए बेहतर?

2026 Honda Passport vs 2026 Honda Pilot: 2026 होंडा पायलट बड़े परिवारों के लिए 3-रो…

February 19, 2026

Bajaj Pulsar 125 या TVS Raider 125 किस बाइक के फीचर्स है ज्यादा खास, कीमत से लेकर जानें सबकुछ

Bajaj Pulsar 125 vs TVS Raider 125: TVS Raider 125 हल्की, तेज और ईंधन-कुशल है,…

February 19, 2026

Edge 60 Fusion vs Nothing Phone 3a:एआई फीचर्स और स्टेबिलाइजेशन में किसका पलड़ा भारी? ₹30,000 से कम में कौन बेस्ट?

Best Smartphone Under 30000: मोटोरोला एज 60 फ्यूजन मीडियाटेक डाइमेंशन 7400 चिपसेट पर चलता है,…

February 19, 2026