Home > देश > ‘नो राइड’ डे! ओला-उबर-रैपिडो ड्राइवरों की हड़ताल से सड़कें खाली, जानिए क्या हैं उनकी मांगें?

‘नो राइड’ डे! ओला-उबर-रैपिडो ड्राइवरों की हड़ताल से सड़कें खाली, जानिए क्या हैं उनकी मांगें?

Uber, Ola, Rapido Stikes Today: देश में ऐप-आधारित टैक्सी ड्राइवरों ने हड़ताल बुलाई है. आज ओला, उबर और रैपिडो ऐप-बेस्ड कैब आप बुक नहीं कर पाएंगे.

By: Preeti Rajput | Published: February 7, 2026 11:26:48 AM IST



Uber, Ola, Rapido Stikes Today: ओला, उबर और रैपिडो ऐप-बेस्ड कैब सर्विस के ड्राइवर आज शनिवार, 7 फरवरी को हड़ताल पर है. इस हड़ताल को ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ कहा जा रहा है. पोर्टर और दूसरे ट्रांसपोर्ट ऐप ड्राइवर भी इस हड़ताल में शामिल हैं. 

क्या है हड़ताल की वजह?

बता दें कि, हड़ताल के पीछे की मुख्य वजह यूनियन रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी को लिखे पत्र को बताया जा रहा है. इस पत्र में ड्राइवरों की एक यूनियन ने बताया था कि ओला, उबर, रैपिडो, पोर्टर और ऑटो, कैब चलाने वाले और दूसरे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के लिए कोई सरकारी या तय किराया स्ट्रक्चर नहीं है. केवल कंपनियां एक तरफ किराया तय कर रही हैं. 

‘बिना रुके शोषण’

यूनियन का कहना है कि ‘इसके कारण लाखों ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के लिए गंभीर इनकम के बिना शोषण और काम करने के मुश्किल पैदा हो रही हैं. यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन और लेबर यूनियनों समेत ड्राइवर्स गिल्ड्स की तरफ से बुलाई गई है. TGPWU ने X पर अपनी पोस्ट में कहा, “पूरे भारत में ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट कर्मचारी 7 फरवरी 26 को ऑल इंडिया ब्रेकडाउन करेंगे. कोई मिनिमम किराया नहीं. कोई रेगुलेशन नहीं. बिना रुके शोषण.”

Yamuna Expressway Accident: आखिर कैसे 6 लोगों को कुचल गया ट्रक? यमुना एक्सप्रेसवे पर रूह कंपा देने वाला हादसा, सड़क पर बिछ गईं लाशें

ट्रांसपोर्ट वर्कर्स की क्या मांगें हैं? 

ओवरसियर नियुक्त करें: मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025, रेगुलेटरी ओवरसाइट की बात करती हैं, जिसका मतलब है कि किराए में ट्रांसपेरेंसी और ड्राइवरों की रोजी-रोटी के लिए एक सरकारी ओवरसियर जरुर होना चाहिए. मिनिमम किराया : इसने ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट सर्विसेज़ के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मिनिमम बेस किराए का तुरंत नोटिफाई करने की भी मांग की गई है. बता दें कि, AAP MP राघव चड्ढा ने राज्यसभा में भी उनके मुद्दे उठाए थे, जबकि ज़ोमैटो/ब्लिंकिट के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने कंपनियों की पॉलिसी का बचाव करने की कोशिश की.

India US Trade Deal: आखिर किन शर्तों पर माने ट्रंप? राष्ट्रपति के साइन से खत्म हुआ 25% टैरिफ, जानें डील की डिटेल्स

Advertisement