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Maratha Protest: मनोज जरांगे कौन हैं, जिसने महाराष्ट्र में फूंक दिया मराठा आरक्षण का बिगुल?

Maratha Quota Protest: महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन का बिगुल फूंकने वाले मनोज जरांगे पाटिल ने कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी, लेकिन बाद में वे कांग्रेस से अलग हो गए।

Published by Sohail Rahman

Maratha Quota Protest Latest News: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन (Maratha Quota Protest) के नेता मनोज जरांगे (Manoj Jarange) एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने 30 अगस्त को फिर से आमरण अनशन शुरू कर दिया है।आपको जानकारी के लिए बता दें कि जरांगे एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग एक बार फिर तेज हो गई है और इस बार मुंबई के आजाद मैदान में बहुत बड़ी मात्रा में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।

मराठा आंदोलन (Maratha Quota Protest) के नेता मनोज जरांगे पाटिल अपने समर्थकों के साथ बीड से एक लंबी पदयात्रा के बाद 29 अगस्त को मुंबई पहुंचे। मनोज जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि जब तक मराठा समुदाय को आरक्षण का अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक वह आजाद मैदान में अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखेंगे।

कौन हैं मनोज जरांगे? (Who is Manoj Jarange)

मराठा आरक्षण आंदोलन का चेहरा बन चुके मनोज जरांगे पाटिल मूल रूप से महाराष्ट्र के बीड जिले के मटोरी गांव के रहने वाले हैं। वर्तमान समय में फिलहाल वह अपने परिवार के साथ जालना में रहते हैं। साल 2010 में, जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तब उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और आंदोलनों में शामिल हो गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी जीविका चलाने के लिए एक होटल में भी काम किया।

जरांगे की पारिवारिक स्थिति आर्थिक रूप से मजबूत नहीं थी। 2016 से 2018 तक उन्होंने जालना में आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व किया। इसके बाद उन्होंने आरक्षण से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए ‘शिवबा’ नाम से एक संगठन बनाया। शुरुआत में वे कांग्रेस कार्यकर्ता (Congress Worker) के तौर पर राजनीति में भी सक्रिय रहे, लेकिन बाद में कांग्रेस से अलग हो गए।

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मनोज जरांगे की क्या है मांग? (Manoj Jarange Demands)

43 वर्षीय मनोज जरांगे मराठा समाज के सभी लोगों को ‘कुनबी’ जाति में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। दरअसल कुनबी जाति पहले से ही अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में आती है। अगर मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता मिल जाती है, तो उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। माना जाता है कि महाराष्ट्र में मराठा समाज की आबादी लगभग 33% है। जरांगे पाटिल का कहना है कि मराठों को उनकी आबादी के हिसाब से आरक्षण मिलना चाहिए और कम से कम 10% आरक्षण तय होना चाहिए।

पानी बंद करने का लिया संकल्प

मराठा आंदोलन का मुख्य चेहरा और सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने सोमवार को अपने अनशन के चौथे दिन से पानी नहीं पीने का संकल्प लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में आरक्षण देने की अपनी मांग को लेकर गोलियां खाने को भी तैयार हैं।

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Sohail Rahman
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