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एक ऐसा ग्राम पंचायत जहां सब रखते हैं दो वोटर कार्ड, एक गांव में दो सरपंच निर्वाचित

कोटिया ग्राम पंचायत आंध्र प्रदेश और ओडिशा के बॉर्डर का क्षेत्र है जिसे दोनों ही राज्य अपना हिस्सा मानते हैं और अपना हिस्सा बताते हैं. इस ग्राम पंचायत में सभी लोगों के पास दो आधार कार्ड, दो राशन कार्ड और यहां तक कि दो-दो वोटर कार्ड हैं. यहाँ के लोग दो-दो राज्य सरकार से योजनाओं का लाभ उठाते हैं.

Published by Swarnim Suprakash

कोटिया पंचायत ओडिशा और आंध्र प्रदेश का एक विवादस्पद गांव है. जहां निर्वाचन आयोग ने प्रत्येक ग्रामीण को दो-दो वोटर कार्ड दे रखा है. सरल भाषा में बताएं तो इस ग्राम पंचायत में सभी ग्रामीणों के पास दो-दो वोटर कार्ड और दो-दो आधार कार्ड है. ग्राम पंचायत कोटिया में दो-दो प्रधान भी हैं. एक प्रधान का वेतन आंध्र प्रदेश राज्य सरकार देती है तो दूसरे प्रधान का वेतन ओडिशा राज्य सरकार देती है. जानकारी के मुताबिक वर्ष 1936 से ये पता ही नहीं लग पा रहा की यह ग्राम पंचायत ओडिशा में है या आंध्रा प्रदेश में?  दोनों ही पक्षों का दावा है की विवादित क्षेत्र उनके राज्य का हिस्सा है. 

एक ग्राम पंचायत में दो-दो सरपंच निर्वाचित

विवादित क्षेत्र (कोटिया) कोरापुट ज़िले के अंतर्गत पोट्टांगी तहसील का एक हिस्सा माना जाता है. ग्राम पंचायत का मुख्यालय कोटिया में है और इसमें कुल 28 गाँव शामिल हैं, जिनमें से 21 गांव आज़ादी के बाद से ही विवाद का विषय बने हुए हैं.
2021-2022 में दोनों सरकारों ने यहाँ पंचायत चुनाव कराए जिसमें सभी ग्रामीणों ने दोनों राज्य के निर्वाचन में भाग लिया और दोनों राज्यों की ओर से दो सरपंच निर्वाचित हुए. 

दो-दो राज्य सरकार से योजनाओं का लाभ

ग्रामीणों इसी बात से खुश हैं कि उन्हें दोनों राज्य सरकारों की ओर  से सुविधाएं उपलब्ध कराइ जा रहीं हैं. दोनों सरकारों की ओर से सभी ग्रामीणों को राशन कार्ड मिले हुए हैं. जिसकी वजह से प्रत्येक राशन कार्डधारी परिवार दो अलग-अलग राज्य की ओर से राशन योजनाओं का लाभ उठाते हैं. सरल भाषा में बताया जाए तो इस गांव का प्रत्येक परिवार दोगुना राशन पाता है. कुछ ग्रामीणों का मानना है कि यदि दो सरकारों से योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं तो दो बार मतदान भी करना आवश्यक है. 

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क्षेत्र के निचले भाग में स्वर्णभंडार की आशंका है विवाद की जड़

माना जाता है कि कोटिया के इस पहाड़ी क्षेत्र के निचले भाग में एक स्वर्णभंडार (गोल्ड माइन) है. यह स्वर्णभंडार ही दोनों राज्यों के बिच इस क्षेत्र को लेकर विवाद का विषय बना हुआ है. 
अब देखना यह कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कोटिया क्षेत्र दो राज्यों के बिच कब तक विवाद का विषय बना रहेगा और कब तक यहां के लोग दो मताधिकारों का प्रयोग करते हुए दो बार मतदान करेंगे. एक व्यक्ति-एक वोट के विधि वाले इस देश में कोटिया के लोग कबतक विवादित क्षेत्र के वासी कहे जाते रहेंगे और दो-दो मताधिकारों का प्रयोग करेंगे?

दो-दो वोटर कार्ड रखने वाला पूरा गांव, दो-दो सरपंच निर्वाचित

कोटिया ग्राम पंचायत आंध्रा प्रदेश और ओडिशा के बॉर्डर का क्षेत्र है जिसे दोनों ही राज्य अपना हिस्सा मानते हैं और अपना हिस्सा बताते हैं. इस ग्राम पंचायत में सभी लोगों के पास दो आधार कार्ड, दो राशन कार्ड और यहां  तक कि  दो-दो वोटर कार्ड हैं. यहाँ के लोग दो-दो राज्य सरकार से योजनाओं का लाभ उठाते हैं.

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Swarnim Suprakash
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