Kedarnath Badrinath Entry Ban: उत्तराखंड में प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों के धार्मिक स्वरूप को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने संकेत दिया है कि केदारनाथ, बद्रीनाथ और समिति के कंट्रोल वाले दूसरे मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की तैयारी चल रही है. आइए जानते हैं कि क्या यह प्रस्तावित रोक सिर्फ मुसलमानों पर लागू होगी या इसमें सिख, बौद्ध और जैन भी शामिल होंगे.
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के चेयरमैन ने क्या कहा
चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने कहा कि गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का मामला चर्चा के लिए मंदिर समिति बोर्ड के सामने रखा जाएगा. अभी तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव या लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है.
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सिखों, बौद्धों और जैनियों की कानूनी स्थिति
सिखों, बौद्धों और जैनियों की मौजूदगी इस मुद्दे को और जटिल बनाती है. कई भारतीय कानूनों, जैसे हिंदू विवाह अधिनियम और कुछ पर्सनल लॉ फ्रेमवर्क के तहत, इन समुदायों को अक्सर हिंदू धर्म की व्यापक कानूनी परिभाषा के तहत ग्रुप किया जाता है. हालांकि यह वर्गीकरण कानूनी और प्रशासनिक प्रकृति का है.
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मंदिर समितियां पारंपरिक रूप से वैधानिक परिभाषाओं के बजाय धार्मिक रीति-रिवाजों के आधार पर प्रवेश नियम तय करती है. मंदिर समिति ने यह साफ नहीं किया है कि वह मंदिर में प्रवेश के मकसद से सिखों, बौद्धों और जैनियों को हिंदू धर्म का हिस्सा मानेगी या उन्हें गैर-हिंदू के तौर पर क्लासिफाई करेगी. फिलहाल मुसलमानों का नाम लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. बार-बार “गैर-हिंदू” शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है.
प्रस्तावित रोक के पीछे का तर्क
प्रस्ताव का मकसद उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थलों की धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक प्रथाओं और आध्यात्मिक माहौल की रक्षा करना है. मंदिर अधिकारियों का तर्क है कि केदारनाथ और बद्रीनाथ सिर्फ टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं हैं, बल्कि बहुत पवित्र स्थान है. प्रवेश पर रोक लगाने पर चर्चा के साथ-साथ समिति ने 2026 के तीर्थयात्रा सीजन के दौरान मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल फोन और कैमरों पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है. श्रद्धालुओं के लिए सख्त नियमों की भी घोषणा की गई है.