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ISRO की बड़ी कामयाबी! चंद्रयान-4 में विक्रम की होगी शानदार लैंडिंग, प्रज्ञान उठाएगा चांद के सैंपल

ISRO ने भारत के चंद्रयान-4 मिशन के लिए चंद्रमा की सतह पर एक लैंडिंग साइट की पहचान की है. जहां विक्रम लैंडर सुरक्षित रूप से उतर सकता है. यह इलाका चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में स्थित है.

Published by Mohammad Nematullah

ISRO ने भारत के चंद्रयान-4 मिशन के लिए चंद्रमा की सतह पर एक लैंडिंग साइट की पहचान की है. जहां विक्रम लैंडर सुरक्षित रूप से उतर सकता है. यह इलाका चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में स्थित है. चंद्रयान-4 मिशन में अभी लगभग दो साल बाकी हैं, लेकिन यह भारत का अब तक का सबसे जटिल चंद्र मिशन है, क्योंकि इसे चंद्रमा की सतह से सैंपल इकट्ठा करने और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है. ISRO के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने पहले कहा था, “हम चंद्रयान-4 के लिए 2028 को टारगेट कर रहे है.”

लैंडिंग की जगह की पहचान कैसे की गई

हमारी सहयोगी पब्लिकेशन टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के शोधकर्ताओं ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटर पर लगे कैमरों द्वारा ली गई हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरों के विस्तृत विश्लेषण के बाद इस जगह की पहचान की. यह क्षेत्र चंद्रमा पर मॉन्स माउटन पहाड़ के पास है और वर्तमान में इस मिशन के लिए सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है.

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लैंडिंग की जगह की पहचान के लिए मानदंड

चंद्रयान-4 मिशन के लिए पहचानी गई लैंडिंग साइट लगभग 1 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है और अब तक लैंडिंग के लिए सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती है. यह एक अपेक्षाकृत सपाट इलाका है, जिससे लैंडर के लिए लैंडिंग आसान हो जाएगी. किसी भी ऐसे मिशन के लिए लैंडिंग साइट की पहचान करना सबसे मुश्किल और चुनौतीपूर्ण कामों में से एक है. ISRO के वैज्ञानिकों ने इसके लिए बहुत सख्त मानदंड तय किए है. उदाहरण के लिए सतह का ढलान 10 डिग्री से कम होना चाहिए बड़े पत्थर कम से कम होने चाहिए, 11-12 दिनों तक लगातार सूरज की रोशनी मिलनी चाहिए, गड्ढे कम होने चाहिए, और पृथ्वी के साथ सीधे रेडियो संचार की आसान पहुंच होनी चाहिए.

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चंद्रमा से सैंपल वापस लाने वाले मिशन में क्या होगा

चंद्रयान-4 मिशन को भारत का सबसे जटिल चंद्र मिशन माना जाता है. इसमें एक प्रोपल्शन मॉड्यूल, एक डिसेंट मॉड्यूल, एक एसेंट मॉड्यूल, एक ट्रांसफर मॉड्यूल और एक री-एंट्री मॉड्यूल शामिल होगा. योजना के अनुसार विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा, और प्रज्ञान रोवर जैसे रोबोटिक सिस्टम का उपयोग करके सैंपल इकट्ठा किए जाएंगे. इसके बाद सैंपल को एसेंडर मॉड्यूल के जरिए चंद्र कक्षा में लाया जाएगा और बाद में री-एंट्री मॉड्यूल द्वारा पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा. 

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चंद्रमा से सैंपल वापस लाने वाले मिशन में शामिल देश

अब गेंद लैंडिंग साइट सिलेक्शन कमेटी के पाले में है, जिसकी मंज़ूरी के बाद चंद्रमा का यह इलाका भारत के पहले चंद्र सैंपल रिटर्न मिशन के लिए तय लैंडिंग साइट बन जाएगा. चंद्रयान-4 मिशन की सफलता भारत को उन चुनिंदा देशों के ग्रुप में शामिल कर सकती है जिन्होंने चंद्रमा से सफलतापूर्वक सैंपल इकट्ठा किए हैं और उन्हें पृथ्वी पर वापस लाए है. इस ग्रुप में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस (पहले USSR) और चीन शामिल है.

Mohammad Nematullah
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