Indian Railway: ट्रेनों में आज कल हर कोई सफर करता है. वहीं ये सफर कई बार चंद घंटों का होता है या कई बार दो-तीन दिन का भी होता है. ऐसे में लोग ट्रेन में ही लंच से लेकर डिनर करते हैं. वहीं जो नॉन वेज खाने के शौकीन हैं उनके लिए ये जानना जरूरी होता है कि क्या ट्रेनों में परोसा या बेचा जाने वाला नॉन-वेज खाना हलाल है या झटके का है? यह सवाल अक्सर विवाद खड़ा करता है. लेकिन, भारतीय रेलवे ने अब इस मामले पर अपनी सफाई दी है. नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन के सदस्य प्रियंका कानूनगो ने इस बात की जानकारी दी है कि उन्हें एक शिकायत मिली थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि क्या भारतीय रेलवे में परोसा या बेचा जाने वाला नॉन-वेज खाना सिर्फ़ हलाल तरीके से काटे गए जानवरों से बनाया जाता है?
ये रहा जवाब
इस मामले को लेकर प्रियंका कानूनगो ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा रेलवे के सामने उठाया और स्पष्टीकरण मांगा. रेलवे ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन की कोई अनिवार्य ज़रूरत नहीं है. उन्होंने रेलवे की तुरंत कार्रवाई करने और उनके सवाल का जवाब देने के लिए तारीफ़ की, जो उनके मुताबिक उनकी ज़िम्मेदारी की भावना को दिखाता है.
जानें क्यों हुआ बवाल
जानकारी के मुताबिक उन्होंने रेलवे को एक नोटिस जारी कर पूछा है कि ट्रेनों में खाना बेचने वाले ठेकेदार या मांस सप्लाई करने वाले सप्लायर जानवरों को काटने के लिए हलाल या झटका तरीका इस्तेमाल करते हैं. यह ज़रूरी है क्योंकि दारुल उलूम देवबंद के अनुसार, सिर्फ़ मुसलमानों को ही हलाल तरीके से जानवरों को काटने की इजाज़त है.
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