S-400 Missiles: भारत के रक्षा मंत्रालय के रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने गुरुवार, 12 फरवरी को कई बड़े रक्षा समझौते पर कई अहम फैसले लिए हैं. जिसमें फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे समेत कई अन्य फैसले शामिल हैं. इसमें डिफेंस सिस्टम S-400 को लेकर भी एक अहम फैसला लिया गया है. दरअसल, भारत ने रूस से ₹10,000 करोड़ के एस-400 सिस्टम के लिए 288 मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी है. बता दें कि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने एस-400 की ताकत खुद देख ली थी. इन मिसाइलों की खरीद से भारत की सेना की ताकत और मजबूत कर देगी. अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में इसे लेकर पूरी जानकारी दी गई है. इस बैठक में अमेरिका से छह पी-8आई टोही विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी गई है. यह सौदा करीब 30 हजार करोड़ का है.
एस-400 मिसाइल की ताकत
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी विमानों और उसके ठिकानों पर हमले के लिए लिए एस-400 से कई मिसाइलें दागी गई थीं. इस कारण इन मिसाइलों का स्टॉक भारत में कम हो गया है. इन स्टॉक को वापस भरने के लिए इस सौदे को मंजूरी दी गई है. इसके साथ ही सेना की कोशिश एस-400 के जखीरे में लॉन्ग और शॉर्ट रेंज की मिसाइलें रखना है. गुरुवार को मिली मंजूरी के तहत 120 शॉर्ट रेंज और 168 लॉन्ग रेंज की मिसाइलें खरीदी जाएंगी. ये खरीद फास्ट ट्रैक तरीके से की जाएगी. सरकार ने मिसाइलों की इस खरीद को मंजूरी दे दी है. जब भारत को इसी साल जून और नवंबर को एस-400 के दो बचे हुए स्क्वाड्रन रूस से मिलने वाले हैं.
एस-400 और पैंटसर मिसाइल सिस्टम
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 की सफलता से भारतीय सेना काफी ज्यादा उत्साहित है. वह इस डिफेंस सिस्टम के और पांच स्क्वाड्रन खरीदने के पक्ष में है. सेना रूस से पैंटसर शॉर्ट रेंज सिस्टम भी खरीदना चाहती है. अगर यह बात मान ली जाती है, तो भारत के पास भविष्य में एस-400 के 10स्क्वाड्रन हो जाएंगे. इस तरह पूरा देश एक मजबूत किले में तब्दील हो जाएगा. एस-400 और पैंटसर मिसाइल सिस्टम की मदद से दो स्तरीय डिफेंस सिस्टम बनाया जा सकेगा. पैंटेसर डिफेंस सिस्टम कमिकाजे ड्रोन सिस्टम से बचाव करता है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि रक्षा मंत्री ने करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावों पर मंजूरी दे दी है.
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