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Ajit Pawar Death: 5 बार डिप्टी सीएम, विवादों से रहा नाता! संघर्षों से भरा रहा अजित पवार का राजनीतिक सफर

Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार काफी लंबे समय से राज्य की सियासत में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं. हालांकि, दूर्भाग्यपूर्ण रुप से आज बुधवार को बारामती में उनका विमान हादसे का शिकार हो गया. 66 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

By: Preeti Rajput | Last Updated: January 28, 2026 12:22:08 PM IST



Ajit Pawar political journey: महाराष्ट्र की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल दिग्गज नेता अजित पवार काफी समय से राज्य की सियासत में अहम भूमिका निभा रहे हैं. अजित पवार को पिछले 13 वर्षों में पांचवीं बार उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं. वह महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक गैर-लगातार उप मुख्यमंत्री बनने वाले नेता थे. दुर्भाग्यपूर्ण रुप से आज बुधवार को बारामती में उनका विमान हादसे का शिकार हो गया. 66 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. उनके निधन से सभी हैरान रह गए हैं और शौक व्यक्त कर रहे हैं. 

5 बार रहे उप मुख्यमंत्री

  • मुख्यमंत्री: पृथ्वीराज चव्हाण – 10 नवंबर 2010 – 25 सितंबर 2012
  • मुख्यमंत्री: पृथ्वीराज चव्हाण – 25 अक्तूबर 2012 – 26 सितंबर 2014
  • मुख्यमंत्री: देवेंद्र फडणवीस – 23 नवंबर 2019 – 26 नवंबर 2019
  • मुख्यमंत्री: उद्धव ठाकरे – 30 दिसंबर 2019 – 29 जून 2022
  • 2 जुलाई 2023 – वर्तमान 

कौन हैं अजित पवार?

अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुआ था. बता दें कि, वह एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं. उनके पिता राजकमल स्टूडियो में काम करते थे. अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की तरह राजनीति में एंट्री ली. वह जनता के बीच दादा नाम से मशहूर थे. उनकी शिक्षा माध्यमिक स्तर तक ही रही.

महाराष्ट्र की राजनीति में अजीत पवार

अजित पवार ने पूरी तरह से राजनीति में कदम साल 1982 में रखा था. उस समय वह केवल 20 साल के थे. उन्होंने सबसे पहले एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़ा. इसके बाद 1991 में वह पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने, इस पद पर वह करीब 16 साल तक रहे. फिर उन्होंने साल 1991 में बारामती से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते, लेकिन उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरह पवार के लिए छोड़ दी. उसी साल वह महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए. साल 1992-1993 कृषि और बिजली राज्य मंत्री बने. साल 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बारामती निर्वाचन क्षेत्र से उन्हें लगातार जीत हासिल हुई. उन्होंने इस दौरान बिजली और जल संसाधन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. जल संसाधन मंत्री रहते हुए उन्होंने कृष्णा घाटी और कोकण सिंचाई परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाली.

सत्ता तक पहुंच का सफर

अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में काफी प्रभावशाली नेता माना जाता है. साल 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने डिप्टी उप मुख्यमंत्री बनने की चाह जताई, लेकिन उस समय ये पद छगन भुजबल को मिला. हालांकि, दिसंबर 2010 में वह पहली बार डिप्टी सीएम बने. साल 2013 में उनका नाम सिंचाई घोटाले से भी जुड़ा. जिसके बाद उन्हें इस पद से इस्तीफा देना पड़ा. बाद, में उन्हें क्लीन चिट मिली और फिर से पद पर लौटे.

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विवादों से रहा लंबा नाता

अजित पवार का राजनीतिक सफर भी विवादों से जुड़ा रहा है. साल 2013 में दिया गया “अगर बांध में पानी नहीं है तो क्या पेशाब करके भरें?” वाले बयान की काफी आलोचना की गई थी. साल 2014 में उनपर लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को धमकाने का भी आरोप लगा था. उन पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे. 

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