Origin of Haryana Name: हरियाणा का नाम तो हर किसी ने सुना है लेकिन इसके बारे में बहुत सी चीजे ऐसी हैं जो लोगों को नहीं पता होती है, तो आइए जानते हैं. आपको बता दें कि इसका गठन 1 नवंबर 1966 को पंजाब से अलग होकर हुआ. इसका नाम संस्कृत शब्द ‘हरि’ (भगवान विष्णु) और ‘आयन’ (आवास) से लिया गया है, जिसका मतलब है ‘ईश्वर का निवास स्थान’. इतिहास में इसे ‘बहुधन्यक’ यानी समृद्ध भूमि के नाम से जाना जाता रहा है. ये क्षेत्र वैदिक काल से जुड़ा हुआ है और महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध का स्थल भी रहा है. कृषि, उद्योग और संस्कृति के क्षेत्र में हरियाणा की अलग पहचान है और इसे अक्सर ‘दूध-दही की भूमि’ कहा जाता .
क्या होता है हरियाणा का मतलब?
हरियाणा का नाम हरि (भगवान विष्णु) और आयन (आवास) से बना है. ये दिखाता है कि ये भूमि धार्मिक दृष्टि से जरूरी है. कुछ विद्वानों के अनुसार इसका नाम ‘आभिरायन’ (अभिर जाति की भूमि) या ‘हरियंका’ (हरित भूमि) से भी जुड़ा हो सकता है.
आपको बता दें कि 1328 ईस्वी में दिल्ली संग्रहालय में एक अभिलेख में इस क्षेत्र को ‘धरती पर स्वर्ग’ कहा गया है. 1280 ईस्वी का एक अन्य अभिलेख इसे हरियाणक के नाम से संदर्भित करता है.
क्या है हरियाणा का इतिहास?
हरियाणा सिंधु घाटी सभ्यता (रखीगढ़ी) और वैदिक सभ्यता का प्रमुख केंद्र रहा है. ये भूमि ब्राह्मवर्त, आर्यावर्त और कुरुक्षेत्र के नाम से जानी जाती थी. महाभारत के युद्ध का मैदान यही स्थित था.
मध्यकाल में ये क्षेत्र अक्सर युद्ध का मैदान रहा, जैसे पानीपत के युद्ध. यहां राजपूत और सुलतानत का शासन भी रहा.
ब्रिटिश राज और विभाजन
1857 की क्रांति के बाद इसे सजा के रूप में पंजाब से जोड़ा गया. 1 नवंबर 1966 को इसे पंजाब से अलग करके एक हिंदी भाषी राज्य बनाया गया. पहले मुख्यमंत्री भगवट दयाल शर्मा बने.
हरियाणा का एग्रीकल्चर
हरियाणा के एग्रीकल्चर को लेकर एक लोकप्रिय कहावत है- ‘देशां में देश हरियाणा, जित दूध दही का खाना’. ये हरियाणा की कृषि समृद्धि, डेयरी उत्पादों का महत्व और सरल जीवनशैली को दर्शाती है.
हरियाणा कृषि और उद्योग में अग्रणी राज्य है. यहां की बासमती चावल की खेती और गुरुग्राम (गुरुग्राम) का विकास विशेष रूप से फेमस है. हरियाणा ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को जन्म दिया है. हरियाणवी लोग सरल, मजबूत और मेहनती हैं.

