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फाइटर जेट का इंजन बनाने में कितना आता है खर्चा? किन-किन देशों में बनता है इसका इंजन, जानिए

Fighter Jet Engine: किसी भी देश के लिए फाइटर जेट इंजन बनाना आसान या सस्ता काम नहीं है. एक नए इंजन के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट कॉस्ट लगभग 2 से 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो सकती है. एक इंजन की प्रोडक्शन कॉस्ट लगभग 10 से 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी लगभग 80 से 200 करोड़ रुपये होती है.

By: Ashish Rai | Published: October 3, 2025 3:43:06 PM IST



Which Countries Make Fighter Jet Engine: रूस ने भारत की आपत्ति के बावजूद पाकिस्तान को एडवांस फाइटर जेट इंजन सप्लाई करने का फैसला किया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने पाकिस्तान एयरफोर्स को JF-17 थंडर एयरक्राफ्ट के लिए एडवांस RD-93MA इंजन सप्लाई करने पर सहमति जताई है. किसी भी फाइटर एयरक्राफ्ट की असली ताकत उसके इंजन में होती है. यह इंजन एयरक्राफ्ट को स्पीड, पावर और लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता देता है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में बहुत कम देश ही अपने खुद के फाइटर जेट इंजन डिजाइन और बना सकते हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि यह बहुत जटिल, महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण काम है. आइए जानते हैं कि कौन से देश फाइटर जेट इंजन बनाते हैं.

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किन देशों में यह क्षमता है?

फिलहाल, अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन और जर्मनी जैसे देश इस क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर माने जाते हैं. अमेरिकी कंपनियां GE एविएशन और प्रैट एंड व्हिटनी F-22 रैप्टर और F-35 जैसे एडवांस एयरक्राफ्ट के लिए इंजन बनाती हैं. रूसी कंपनियां सैटर्न और क्लिमव Su-30 और Su-57 जैसे फाइटर जेट को पावर देती हैं. फ्रांसीसी कंपनी साफ्रान राफेल के लिए इंजन बनाती है, जबकि ब्रिटिश कंपनी रोल्स-रॉयस यूरोफाइटर टाइफून की मुख्य सप्लायर है.

चीन ने WS सीरीज इंजन विकसित किया है, लेकिन तकनीकी विश्वसनीयता के मामले में वह अभी भी पश्चिमी देशों से पीछे है. जर्मन कंपनी MTU एरो इंजन्स यूरोपीय प्रोजेक्ट्स में एक प्रमुख खिलाड़ी है. भारत की बात करें तो, देश अभी तक पूरी तरह से स्वदेशी इंजन विकसित करने में सफल नहीं हुआ है. हालांकि, DRDO और HAL लंबे समय से कावेरी इंजन पर काम कर रहे हैं और भारत भविष्य में इस तकनीक में आत्मनिर्भरता हासिल करने की कोशिश कर रहा है.

इंजन बनाने में कितना खर्च आता है?

किसी भी देश के लिए फाइटर जेट इंजन बनाना आसान या सस्ता काम नहीं है. एक नए इंजन के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट कॉस्ट लगभग 2 से 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो सकती है. एक इंजन की प्रोडक्शन कॉस्ट लगभग 10 से 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी लगभग 80 से 200 करोड़ रुपये होती है. कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि इंजन किस तरह के जेट के लिए बनाया गया है और उसमें इस्तेमाल की गई तकनीक कितनी एडवांस है.

इतना मुश्किल क्यों है यह काम?

फाइटर जेट इंजन को बहुत ज़्यादा तापमान, तेज़ स्पीड और लगातार दबाव का सामना करना पड़ता है. इसके लिए सुपर-अलॉय मेटल, माइक्रो-टर्बाइन टेक्नोलॉजी और जटिल डिजाइन की ज़रूरत होती है. इसीलिए ज़्यादातर देश अभी भी इंजन टेक्नोलॉजी के लिए बड़ी शक्तियों पर निर्भर रहते हैं.

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