Kurdish Muslim: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि यह संघर्ष जल्द जमीनी लड़ाई में तब्दील होने वाला है. इस युद्ध के बीच सबसे महत्वपूर्ण नाम कुर्द मुसलमान का उभरकर सामने आ रहा है. ईरान की घेराबंदी करने के लिए अब ईरान कुर्द लड़ाकों के साथ संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है. कुर्द मुसलमान दशकों से अपनी एक अलग पहचान बनाने और देश के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उत्तरी इराक से उठी कुर्द विद्रोह की आवाज ने तेहरान की चिंता को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है. लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह कुर्द कौन हैं?
ईरान-इजरायल युद्ध
ईरान के खिलाफ संभावित जमीनी सैन्य अभियान में कुर्द समुदायों अहम भूमिका निभा सकते हैं. हाल ही कि एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरानी सीमा पर सक्रिय कुर्द राष्ट्रवादी समूहों को एकजुट करने का प्रयास करने की कोशिश कर रहा है. ताकि जरुरत पड़ने पर उन्हें ईरानी सेना के विरुद्ध इस्तेमाल किया जा सके. अल जजीरा की एक रिपोर्ट में कुर्द नेताओं की तरफ से संकेत दिए हैं कि वह सीमा पार जमीनी हमले करने के लिए भी तैयार है. अगर ऐसी स्थिति पैदा होती है, तो ईरान के लिए आंतरिक और बाहरी, दोनों मोर्चों मुसीबतें पैदा हो सकती हैं. क्योंकि कुर्द आबादी महत्वपूर्ण रुप से पहाड़ी इलाकों में बसती है.
शिया हैं या सुन्नी?
कुर्द समुदाय की धार्मिक पहचान को लेकर अक्सर स्थिति असमंजस की बनी रहती है. खासतौर पर तब जब वह शिया ईरान या इराक में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे होते हैं. कुर्द मुसलमान मुख्य तौर पर सुन्नी होते हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 75 प्रतिशत या उससे अधिक कुर्द शफीई मदहब (Shafi’i school) का पालन करने वाले सुन्नी मुस्लिम होते हैं. यह मुख्य तौर से तुर्की, सीरीया और ईराक में निवास करते हैं.
हालांकि, कुर्द के भीतर धार्मिक विविधता भी देखने को मिलती है. शिया कुर्द ईरान और इराक के सीमावर्ती क्षेत्रों पाए जाते हैं. जिन्हें फैली कुर्द के नाम से जाना जाता है. लेकिन वह कुर्द आबादी में अल्पसंख्यक हैं. इसके अलावा कुर्द अलेवी (Alevi), याजिदी (Yazidi) और सूफी परंपराओं का पालन करते हैं. कुर्दों के लिए उनकी ‘कुर्द सांस्कृतिक और भाषाई पहचान’ उनके धार्मिक संप्रदाय से महत्वपूर्ण मानी जाती है.
सबसे बड़ा एथनिक ग्रुप
बता दें कि, कुर्द सबसे बड़ा एथनिक ग्रुप है, जिसकी अपनी अलग भाषा, संस्कृति और परंपराएं हैं. इनकी भाषा इंडो-यूरोपियन परिवार की ईरानी शाखा से जुड़ी हुई मानी जाती है. इनकी आबादी दुनियाभर में 2.5 करोड़ से 4.5 करोड़ के बीच में है. इतनी अधिक आबादी होने के बाद भी कुर्दों का अपना कोई स्वतंत्र राष्ट्र नहीं है. वे लंबे समय से ‘कुर्दिस्तान’ नाम के एक अलग देश की मांग कर रहे हैं.
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जंग पर कुर्द का रुख
अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान की जंग काफी लंबे समय से चलती आ रही है. कुर्द लड़ाके ईरान के भीतर अस्थिरता फैलाने का एक बड़ा जरिया बन सकते हैं. ईरान हमेशा अपनी कुर्द अल्पयंख्यकों के अलगाववादी आंदोलनों को लेकर काफी सख्त है. अब अमेरिका द्वारा इन्हें हथियार और समर्थन दिए जाने की खबर से तेहरान के लिए खतरे की घंटी हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या कुर्द अपनी आजादी के सपने को पूरा करने के लिए वह किसका पक्ष चुनने वाले हैं.
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