क्या मुसलमान मंदिर में जाकर पूजा कर सकते हैं? जानें इसे लेकर क्या कहता है इस्लाम

Muslims go to the temple: बॉलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भरूचा आजकल अपनी फिल्मों से ज़्यादा विवादों की वजह से सुर्खियों में हैं. हाल ही में, एक्ट्रेस उज्जैन के दुनिया भर में मशहूर महाकालेश्वर मंदिर गईं.

Published by Heena Khan

Can Muslims go to the temple: बॉलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भरूचा आजकल अपनी फिल्मों से ज़्यादा विवादों की वजह से सुर्खियों में हैं. हाल ही में, एक्ट्रेस उज्जैन के दुनिया भर में मशहूर महाकालेश्वर मंदिर गईं, जहाँ उन्होंने भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की. हालाँकि, भक्ति का यह काम अब एक बड़े विवाद में बदल गया है, क्योंकि ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

क्या कहते हैं मौलाना शहाबुद्दीन?

ये मामला तब भड़क उठा जब मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा है कि, एक मुस्लिम महिला का मंदिर जाकर पूजा करना, जल चढ़ाना और हिंदू धार्मिक परंपराओं का पालन करना इस्लाम के खिलाफ है. मौलाना के मुताबिक, इस्लाम और शरीयत ऐसे कर्मों की अनुमति नहीं देते. नुसरत भरूचा ने इस कदम को धार्मिक नियमों का उल्लंघन बताया है. चलिए जान लेते है इसे लेकर इस्लाम क्या कहता है?

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मंदिर में पूजा करने को लेकर क्या कहता है इस्लाम?

नुसरत भरूचा के यहां पूजा करने के बाद कई लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है. क्या एक मुस्लिम होने के बाद भी नुसरत भरूचा मंदिर में पूजा कर सकती हैं? इसे लेकर इस्लाम में क्या कहा गया है. चलिए आपको बताते हैं पूरी जानकारी. यह जानना ज़रूरी है कि इस्लाम एक एकेश्वरवादी धर्म है. इसका मतलब है कि इस्लाम को मानने वाले सिर्फ़ अल्लाह की पूजा कर सकते हैं. वे किसी दूसरे धर्म की पूजा में हिस्सा नहीं ले सकते. खासकर मूर्ति पूजा को शिर्क (बहुदेववाद) माना जाता है, जो इस्लाम में सबसे बड़ा पाप है.

कुरान और हदीस के अनुसार, दूसरे धर्म की पूजा में हिस्सा लेना इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ है. इस्लामी विद्वानों में आम सहमति यह है कि दूसरे धर्मों का सम्मान करना तो जायज़ है, लेकिन उनके धार्मिक रीति-रिवाजों में हिस्सा लेना इस्लाम में मना है. अगर कोई मुसलमान ऐसा करता है, तो इस्लामी कानून के अनुसार उसके खिलाफ फतवा (धार्मिक आदेश) जारी किया जा सकता है. हालांकि, मुस्लिम नेताओं को आम तौर पर अलग-अलग धर्मों के धार्मिक स्थलों पर जाने की इजाज़त होती है, लेकिन इस्लामी विद्वानों और धर्मगुरुओं के अनुसार, उन्हें पूजा-पाठ में हिस्सा नहीं लेना चाहिए.

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