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Bihar Chunav में गजब खेल! तीन सीटों पर हार गए एनडीए-महागठबंधन के उम्मीदवार, अब कौन बनेगा राजनीति का गेमचेंजर?

Bihar Chunav 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव मोहनिया, सुगौली और मढ़ौरा सीटों पर लगा झटका. आजेडी की श्वेता सुमन, वीआईपी के शशि भूषण सिंह और एलजेपी (आर) की सीमा सिंह का नामांकन रद्द होने से महागठबंधन और एनडीए को नुकसान हो सकता है.

By: Mohammad Nematullah | Published: October 22, 2025 4:20:14 PM IST



Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है. वैसे-वैसे ही नामांकन रद्द की घटना सामने आ रही है. नामांकन पत्र के बाद 3 विधानसभा सीटों पर समीकरण अचानक बदल गया है. इसमें से 2 सीटें महागठबंधन की है. जबकि NDA को एक झटका लगा है. दरअसल मोहनिया, सुगौली और मढ़ौरा विधानसभा सीटों से तीन उम्मीदवारों के नामांकन खारिज कर दिए गए है. इसका मतलब है कि तीनों गठबंधनों को बिना चुनाव लड़े ही इन सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा है.

क्यों हुआ नामांकन खारिज?

सबसे ज्यादा चर्चा मोहनिया विधानसभा सीट की है. जहां राजद उम्मीदवार श्वेता सुमन का नामांकन खारिज हो गया है. जहां राजद उम्मीदवार चुनाव आयोग की जांच में पाया गया कि श्वेता सुमन ने 2020 के विधानसभा चुनाव में भी मोहनिया से अपना नामांकन दाखिल किया था. लेकिन उन्होंने अपना पता उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र में दर्ज कराया था. इस बार श्वेता सुमन ने बिहार का पता दिया था. लेकिन चुनाव आयोग ने पर्याप्त सबूत के बिना उनके दावे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. आयोग ने फैसला सुनाया कि श्वेता सुमन अभी भी उत्तर प्रदेश की निवासी मानी जाएंगी. इस प्रकार बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उनका नामांकन अमान्य हो गया. इस फैसले से राजद को बड़ा झटका लगा है. क्योंकि पिछली बार मोहनिया सीट पर पार्टी की मजबूत पकड़ थी. अब महागठबंधन को रणनीति बनानी होगी कि वह नया उम्मीदवार उतारे या किसी सहयोगी दल का समर्थन करे.

महागठबंधन को लगा झटका

पूर्वी चंपारण की सुपौल विधानसभा सीट पर भी महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है. विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के उम्मीदवार शशि भूषण सिंह का नामांकन तकनीकी खामियों के कारण खारिज कर दिया गया. खबरों के मुताबिक, नामांकन पत्र में कुछ जरूरी दस्तावेज अधूरे थे और सत्यापन के दौरान आयोग को कई खामियां मिली है. जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने शशि भूषण सिंह का नामांकन अवैध घोषित कर दिया. इस घटनाक्रम ने न सिर्फ़ वीआईपी, बल्कि पूरे महागठबंधन के समीकरण को नुकसान पहुंचायेगा. क्योंकि सुपौल सीट पर एनडीए का महागठबंधन से सीधा मुकाबला माना जा रहा था.अब महागठबंधन को या तो नए उम्मीदवार की घोषणा करनी होगी या किसी निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करना होगा.

मढ़ौरा में भी बड़ा झटका

छपरा जिले की मढ़ौरा विधानसभा सीट पर एनडीए को तीसरा बड़ा झटका लगा है. चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की उम्मीदवार सीमा सिंह का नामांकन रद्द कर दिया गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार सीमा सिंह के नामांकन पत्र में आयकर और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों में गंभीर त्रुटियां थी. सत्यापन के दौरान ये विसंगतियां सामने आने के बाद चुनाव अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया. इससे मढ़ौरा में एनडीए की स्थिति कमजोर हो गई है. क्योंकि नामांकन की समय सीमा समाप्त होने के कारण लोजपा (रामविलास) इस सीट पर नया उम्मीदवार नहीं उतार सकती. यह सीट एनडीए के लिए बिना किसी लड़ाई के संभावित हार का कारण बन गई है.

गठबंधन आगे क्या रणनीति अपनाएगा?

यह देखना दिलचस्प होगा कि राजद, वीआईपी और लोजपा (रामविलास) इन सीटों के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं। क्या ये दल निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे, या गठबंधन के भीतर सीटों के तालमेल का कोई नया फॉर्मूला सामने आएगा? फ़िलहाल, यह तय है कि 2025 का बिहार चुनाव तीन हार और कई सवालों के साथ शुरू हो चुका है, और क्या इन तीन सीटों की कहानी इस चुनाव के शुरुआती राजनीतिक नतीजों की ओर इशारा करती है?

क्या होगी रणनीति?

यह देखना दिलचस्प होगा कि राजद VIP और लोजपा (रामविलास) इन सीटों के लिए क्या रणनीति अपनाते है. क्या ये दल निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करेगा या फिर गठबंधन के भीतर सीटों के तालमेल का कोई नया फॉर्मूला सामने आएगा? फिलहाल यह तय है कि 2025 का बिहार चुनाव तीन हार और कई सवाल के साथ शुरू हो चुका है और क्या इन तीन सीटों की कहानी इस चुनाव के शुरुआती राजनीतिक नतीजा की ओर इशारा करती है?

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