Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज बजट 2026 में EPF वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से नहीं बढ़ाया. इसके साथ ही, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF), एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) में एनरोलमेंट के लिए ज़रूरी EPF वेज लिमिट में कोई बदलाव नहीं हुआ है. EPF वेज सीलिंग 2014 से वैसी ही बनी हुई है. चार्टर्ड अकाउंटेंट अक्षय जैन, पार्टनर, NPV & Associates LLP, का कहना है कि अगर EPF वेज सीलिंग बढ़ा दी जाती, तो कर्मचारी मार्केट से जुड़े जोखिमों पर निर्भर हुए बिना काफी बड़ा, टैक्स-एफिशिएंट रिटायरमेंट कॉर्पस बना सकते थे.
अगर पहले बढ़ जाती EPF वेज सीलिंग तो क्या होता?
प्रतीक वैद्य, मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ विजन ऑफिसर, कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, ने कहा, “अगर EPF वेज सीलिंग पहले बढ़ा दी गई होती, तो कर्मचारियों को अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स पर सालों तक ज़्यादा कंपाउंडिंग का फायदा मिलता. समय पर रिवीजन से EPF सेविंग्स बढ़ती हुई सैलरी और रहने के खर्च के साथ तालमेल बिठा पातीं, जिससे रिटायरमेंट की बेहतर तैयारी और बेहतर पेंशन नतीजे सुनिश्चित होते. आइए जानते हैं कि कर्मचारियों के लिए बढ़ी हुई सैलरी लिमिट क्यों ज़रूरी है और EPF वेज सीलिंग बढ़ने का मालिकों पर क्या असर हो सकता है.
EPF वेज सीलिंग क्या है ?
जैन कहते हैं कि EPF वेज सीलिंग वह अधिकतम मासिक सैलरी (बेसिक + DA) है जिसका इस्तेमाल EPF, EPS और EDLI स्कीम के लिए अनिवार्य एनरोलमेंट तय करने के लिए किया जाता है. जैन आगे कहते हैं, “यह बहुत ज़रूरी है क्योंकि यह तय करता है कि इन सोशल सिक्योरिटी स्कीम में किसे हिस्सा लेना है, जो सीधे रिटायरमेंट सेविंग्स, पेंशन की रकम पर असर डालता है और लंबे समय की फाइनेंशियल सिक्योरिटी को बढ़ाता है.”
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