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Rudram 4: DRDO की यह हाइपरसोनिक मिसाइल दुश्मन पर बरसाएगी कहर, खासियत जानकर छूट जाएंगे पसीने

Rudram 4 Hypersonic Missile: अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अब ऐसी रक्षा प्रणाली बना रहा है, जो पहले से भी ज़्यादा ताक़तवर और घातक है। विमान हो या ड्रोन या फिर मिसाइल, अब इन्हें नई टेक्नोलॉजी से लैस किया जा रहा है।

By: Deepak Vikal | Published: August 29, 2025 5:49:37 PM IST



DRDO Project: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी सुरक्षा पर ध्यान देना शुरू दिया है और उसे उन्नति पर ले जाने का प्रयास जारी है। अंतरिक्ष की बात हो या ज़मीन की, भारत की तैयारी जोर पकड़ रही है। अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अब ऐसी रक्षा प्रणाली बना रहा है, जो पहले से भी ज़्यादा ताक़तवर और घातक है। विमान हो या ड्रोन या फिर मिसाइल, अब इन्हें नई टेक्नोलॉजी से लैस किया जा रहा है। DRDO के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत के नेतृत्व में भारत अब अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी को प्रगतिशील बना रहा है वह भी रुद्रम-4 प्रोजेक्ट के साथ। 

रुद्रम-4 की विषेश बातें

रुद्रम-4 हाइपरसोनिक स्पीड मैक 5 और 1000-1500 किमी की रेंज के साथ डिज़ाइन किया गया है। यह रुद्रम-3 के मुक़ाबले दो से तीन गुना अधिक प्रभावी है। इसको इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इसमें विभिन्न भारतीय वायुसेना (IAF) प्लेटफॉर्म्स जोड़े जा सकते हैं, जिसमें Sukhoi Su-30 MKI, मिराज-2000 और संभवतः राफेल भी शामिल हैं। DRDO की इस कोशिश को अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। 

पिछले चरणों के मुकाबले ज़्यादा ताकतवर

रुद्रम शृंखला को DRDO के एडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरटरी (ASL) द्वारा हैदराबाद में डेवलप किया गया था। यह भारत के स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए एयर-लॉन्च एंटी-मिसाइल (ARMs) और स्टैंड-ऑफ हथियारों की फर्स्ट फैमिली का प्रतिनिधित्व करता है। रुद्रम-4 दुश्मन देश के पूरे डिफेंस सिस्टम, रडार, संचार ठिकानों आदि को नष्ट करने में सक्षम होगा, जिनपर आम मिसाइलों का ज़ोर नहीं चल पाता। इसकी हाइपरसोनिक स्पीड को खास तौर पर टर्मिनल फेज़ और क्वासी-बैलिस्टिक ट्रेजेक्टरी में इसको रोकना नामुमकिन हो सकता है। इसका वज़न रुद्रम सीरीज की मिसाइलों में सबसे कम है, जिसके कारण यह ज़्यादा मिसाइलें ले जाने में सक्षम होगा। संभावना है कि अंतिम चरण में इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS), जीपीएस और इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर अपडेट किया जाए। रुद्रम चीन के HQ-9 और रूस के S-400 के समान है।

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भविष्य का साथी

DRDO के हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) और स्क्रैमजेट इंजन प्रोजेक्ट रुद्रम-4 के विकास से जुड़ा है। इसके परिचालन में शामिल होने की तिथि गोपनीय है, लेकिन आने वाले वर्षों में प्रोटोटाइप परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है। ये सिर्फ एक मिसाइल तक सीमित नहीं, बल्कि मल्टीटास्किंग प्रोजेक्ट है जो भारत को उन देशों की सूची में जोड़ेगा जिनके पास हाइपरसोनिक सिस्टम मौजूद है।

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