Supreme court: सुप्रीम कोर्ट में चुनाव में वोट ना डालने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई या फिर पाबंदियां लगाने की याचिका दाखिल की गई थी. इस याचिका पर अदालत ने सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि ये एक नीतिगत मामला है. अगर कोई व्यक्ति वोट नहीं करता है, तो उसे वोट देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. हालांकि, याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकरण के पास जाने की अनुमति दे दी गई है.
क्या बोले CJI सूर्यकांत?
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका अजय गोयल की तरफ से दाखिल की गई थी. इस पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर इस तरह की मांग स्वीकार कर ली जाए, तो फिर मेरे भाई जस्टिस बागची को भी बंगाल जाकर वोट देना होगा. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि न्यायिक कार्य भी बहुत महत्वपूर्ण है.
लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दें?
CJI ने आगे कहा कि ‘अब हम क्या लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दें? भारत एक ऐसा लोकतांत्रिक देश है, जहां 75 सालों से लोगों के विवेक पर भरोसा किया गया है. सभी से मतदान की उपेक्षा रखी जाती है, लेकिन अगर कोई ऐसा नहीं करता है, तो उसे वोट देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.’
वकील ने दिया सुझाव
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ‘जो लोग वोट नहीं देते, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलना चाहिए. इस पर CJI ने कहा कि आप ये काम हमारी तरफ से कर लीजिए. कोर्ट ने कहा कि- वोट न देने पर दंडात्मक प्रावधान लागू करना नीति से जुड़ा मामला है, जो सरकार और विधायिका के अधिकार में आता है.