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Kiss Day Special: क्या Kiss से मिलती है सुकून और खुशी? जानिए इसके पीछे की बायोलॉजी?

Kiss Day: आज किस डे है. और आज के दिन पार्टनर अपने पार्टनर को किस कर अपने प्यार को और मजबूत करता है. किस करना सिर्फ़ फिल्मों वाला रोमांटिक पल नहीं है. इसके पीछे हमारे दिमाग, हॉर्मोन और भावनाओं की गहरी साइंस काम करती है.

By: Heena Khan | Published: February 13, 2026 12:27:50 PM IST



Kiss Day: आज किस डे है. और आज के दिन पार्टनर अपने पार्टनर को किस कर अपने प्यार को और मजबूत करता है. किस करना सिर्फ़ फिल्मों वाला रोमांटिक पल नहीं है. इसके पीछे हमारे दिमाग, हॉर्मोन और भावनाओं की गहरी साइंस काम करती है. जब हम किसी को किस करते हैं, तो शरीर में कई तरह के केमिकल्स रिलीज़ होते हैं जो हमें अच्छा महसूस कराते हैं, तनाव कम करते हैं और रिश्तों को मजबूत बनाते हैं. यानी किस सिर्फ़ प्यार का इशारा नहीं, बल्कि एक बायोलॉजिकल कनेक्शन है.

दिमाग में क्या होता है जब हम किस करते हैं?

जब दो लोग किस करते हैं, तो दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम एक्टिव हो जाता है. इससे हमें खुशी और सुकून का एहसास होता है. होंठ हमारे शरीर का बहुत सेंसिटिव हिस्सा होते हैं. यहां हजारों नर्व एंडिंग्स (तंत्रिकाएं) होती हैं. जैसे ही होंठ छूते हैं, दिमाग को सिग्नल मिलता है और वह कई हॉर्मोन रिलीज़ करता है. इस पल में दिमाग समझता है कि यह एक खास और सुरक्षित रिश्ता है. इसलिए वह ऐसे केमिकल्स छोड़ता है जो हमें उस इंसान के और करीब लाते हैं.

ऑक्सीटोसिन: भरोसे और लगाव का हॉर्मोन

ऑक्सीटोसिन को “लव हॉर्मोन” या “बॉन्डिंग हॉर्मोन” कहा जाता है. जब हम किसी को प्यार से किस करते हैं,चाहे वह पार्टनर हो, बच्चा हो या माता-पिता—तो ऑक्सीटोसिन रिलीज़ होता है. यह हॉर्मोन भरोसा बढ़ाता है, डर कम करता है और रिश्ते को मजबूत बनाता है. यही कारण है कि मां जब बच्चे को माथे पर किस करती है, तो बच्चा सुरक्षित महसूस करता है. रोमांटिक रिश्तों में भी यही हॉर्मोन पार्टनर के बीच भावनात्मक जुड़ाव को गहरा करता है.

डोपामाइन: खुशी और एक्साइटमेंट

डोपामाइन को “फील-गुड हॉर्मोन” कहा जाता है. जब आप अपने रोमांटिक पार्टनर को किस करते हैं, तो डोपामाइन बढ़ता है. इससे दिल की धड़कन तेज हो सकती है, चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और अंदर से खुशी महसूस होती है. इसी वजह से नई मोहब्बत में एक छोटी सी किस भी बहुत खास लगती है. यह दिमाग को सिग्नल देती है कि यह अनुभव सुखद है और दोबारा करना चाहिए.

स्ट्रेस कम करने में मिलती है मदद

किस करने से शरीर में “कॉर्टिसोल” नाम का स्ट्रेस हॉर्मोन कम होता है. जब हम किसी अपने को गले लगाते हैं या किस करते हैं, तो तनाव कम होने लगता है.ऑफिस की थकान या दिनभर की टेंशन के बाद पार्टनर का एक प्यार भरा किस सुकून दे सकता है. यही कारण है कि रिश्तों में शारीरिक स्नेह मानसिक सेहत के लिए भी जरूरी माना जाता है.

अलग-अलग रिश्तों में अलग एहसास

  • हर किस का मतलब एक जैसा नहीं होता.
  • माता-पिता और बच्चे के बीच किस: यह सुरक्षा, देखभाल और बिना शर्त प्यार का प्रतीक है. यहां रोमांस नहीं, बल्कि अपनापन और संरक्षण की भावना होती है.
  • दोस्तों के बीच किस (जैसे गाल पर): यह स्नेह और अपनापन दिखाता है.
  • रोमांटिक पार्टनर के बीच किस: इसमें आकर्षण, जुनून और गहरा भावनात्मक जुड़ाव शामिल होता है.
  • हर रिश्ते में दिमाग अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है, लेकिन मकसद एक ही है, कनेक्शन मजबूत करना.

दिल, दिमाग और बॉन्डिंग का मेल

किस करना सिर्फ़ एक रोमांटिक इशारा नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों की गहराई से जुड़ा एक प्राकृतिक तरीका है. यह हमें सुरक्षित महसूस कराता है, भरोसा बढ़ाता है, तनाव कम करता है और खुशी देता है. चाहे मां का माथे पर प्यार हो, दोस्त का गाल पर स्नेह या पार्टनर का रोमांटिक किस—हर बार हमारा दिमाग और दिल मिलकर एक खास कनेक्शन बनाते हैं. इसलिए अगली बार जब आप किसी अपने को किस करें, तो समझिए कि यह सिर्फ़ एक पल नहीं, बल्कि आपके शरीर और भावनाओं की खूबसूरत साइंस है.

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