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Venezuela Attack : इधर राष्ट्रपति मादुरो को US ने उठाया, उधर तेल बाज़ार में मची हलचल; जानें भारत पर कैसे पड़ेगा इसका असर?

International Oil Market: दुनिया भर के देश वेनेजुएला के घटनाक्रम पर करीब से नज़र रख रहे हैं, जिससे तेल से भरपूर इस देश से कच्चे तेल की सप्लाई में संभावित रुकावटों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.

By: Shubahm Srivastava | Published: January 4, 2026 3:11:28 AM IST



US Attack Venezuela: काराकास में शनिवार (03 जनवरी, 2026) को अमेरिकी हमलों के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका ने गिरफ्तार कर लिया है. दोनों अभी अमेरिकी हिरासत में हैं और उन्हें वेनेजुएला से बाहर ले जाया गया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों के बाद इसकी घोषणा की है. उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया था.

इस घटना के बाद ग्लोबल तेल बाज़ार में भी हलचल मच गई है. दुनिया भर के देश वेनेजुएला के घटनाक्रम पर करीब से नज़र रख रहे हैं, जिससे तेल से भरपूर इस देश से कच्चे तेल की सप्लाई में संभावित रुकावटों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.

वेनेजुएला के पास सबसे बड़े तेल भंडार

वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े साबित तेल भंडार हैं. हालांकि, हाल के सालों में ग्लोबल तेल कीमतों पर इसका असर सीमित रहा है क्योंकि लंबे समय से लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण निर्यात प्रतिबंधित रहा है. फिलहाल, राजनीतिक झटके के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें $60 प्रति बैरल के स्तर के आसपास अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं.

तेल संचालन जारी

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA ने कहा कि शनिवार को उसका उत्पादन और रिफाइनिंग गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही थीं. कंपनी ने कहा कि अमेरिकी हमलों के दौरान उसकी प्रमुख तेल सुविधाओं को कोई नुकसान नहीं हुआ है.

रॉयटर्स ने यह भी बताया कि राजधानी काराकास के पास ला गुएरा बंदरगाह को गंभीर नुकसान हुआ है, हालांकि इस बंदरगाह का इस्तेमाल तेल निर्यात के लिए नहीं किया जाता है.

दिसंबर में, ट्रंप ने वेनेजुएला में आने या जाने वाले तेल टैंकरों पर नाकाबंदी की घोषणा की थी. बाद में अमेरिका ने वेनेजुएला के कच्चे तेल के दो कार्गो ज़ब्त कर लिए. इन कदमों के कारण कई जहाज़ मालिकों ने वेनेजुएला के पानी से बचना शुरू कर दिया, जिससे PDVSA के पास रखे तेल के स्टॉक में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई. कंपनी को उत्पादन और रिफाइनिंग जारी रखने के लिए बंदरगाहों पर डिलीवरी धीमी करनी पड़ी और कच्चे तेल को टैंकरों में स्टोर करना पड़ा.

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में वेनेजुएला का तेल उत्पादन रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया, जो साल के लिए लगभग 192 मिलियन बैरल तक पहुंच गया. 2021 में उत्पादन में सुधार होना शुरू हुआ, जो लगभग 550,000 से 630,000 बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया.

क्या भारत पर पड़ेगा इसका कोई असर? 

यह स्थिति भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है. जबकि चीन वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, भारत पहले एक प्रमुख आयातक था. अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 2021 और 2022 में भारतीय खरीद में भारी गिरावट आई.

2023-24 में तेल व्यापार फिर से शुरू हुआ, जिसमें वेनेजुएला से भारत का पेट्रोलियम आयात बढ़कर लगभग $1 बिलियन हो गया. द फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार, दिसंबर 2023 में भारत कुछ समय के लिए वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था.

भारत की व्यापार एजेंसियों और UN COMTRADE डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में आयात बढ़कर लगभग 63,000-100,000 बैरल प्रति दिन हो गया, जो पिछले साल की तुलना में काफी ज़्यादा है. IEA ने कहा कि भारत 2025 के अधिकांश समय तक तीसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, हालांकि बाद में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़े होने के कारण आयात में गिरावट आई.

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