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बेपर्दा हुआ ईरान का सुप्रीम लीडर, भारत के कई राज्यों के बजट से भी ज्यादा है नेटवर्थ; हैरान कर देंगे खुलासे

Mojtaba Hosseini Khamenei: मोजतबा हुसैनी खामेनेई अपने नाम पर एसेट्स रखने से बचते हैं, लेकिन वे सीधे तौर पर डील्स में शामिल होते हैं. इनमें से कुछ  वर्ष 2011 तक की हैं.

Published by JP Yadav

Mojtaba Hosseini Khamenei: अरब की ही कहानी बड़ी मशहूर है. एक बादशाह के शासन में सब सुखी थे. शासन भी अच्छा चल रहा था, लेकिन बादशाह को इस बात का मलाल था कि ज्यादातर लोग नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं.  उस दौर में एक बाबा यानी फकीर का जनता पर ज्यादा इकबाल था. लोग बादशाह से अधिक उस बाबा की बात मानते थे. बादशाह ने खुद बाबा से गुजारिश की. कहा कि आप अगर जनता से नशे की लत छोड़ने की गुजारिश करें तो देश का भला होगा. बाबा ने ऐसा ही किया.

छह महीने बाद बादशाह ने जायजा लिया तो पता चला कि पहले की तुलना में ज्यादा लोग नशे की गिरफ्त में हैं. जांच कराई तो  जो सच सामने आया वह होश उड़ा देने वाला था. दरअसल, बाबा के बेटे ने नशे का कारोबार हाथ में ले लिया और कारोबार कहीं अधिक फलने-फूलने लगा. बाबा के बेटे ने बादशाह को बंदी बना लिया और अपने पिता गद्दी पर बैठा दिया. यह कहानी सदियों से दोहराई जाती रही है. ईरान का मामला भी कुछ-कुछ ऐसा ही है. 

यह सच है कि तरक्की की जो सीढ़ियां ऊपर की ओर जाती हैं वही बुरे वक्त में नीचे भी लाती हैं. राजनीति और सत्ता की कुर्सी में तो अक्सर यही होता है. अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई कब्र में तब्दील हो गए हैं. उनके परिवार के लोगों ने भी इस हमले में जान गंवाई है.  उनके करीबी और समर्थक भले ही दुखी हों, लेकिन इस शख्स ने 36 साल तक ईरान में तानाशाही की. महिलाओं पर अत्याचार किए.

अपनी संकुचित मानसिकता को लोगों पर लादा. लोगों के खासतौर से महिलाओं के अधिकार कुचले. जब-जब लोगों ने विद्रोह की कोशिश की और सच बोलना का साहस किया तो उन्हें ताकत के बल पर कुचला गया. बेशक तानाशाह को यह पता होता है कि उसका अंत बुरा होगा, लेकिन यह दुनिया के सामने जाहिर नहीं करता है. 

सबसे बड़ी बड़ी बात है कि 1000 साल के इतिहास में जितने भी तानाशाह हुए हैं वह बुजदिल थे. उन्होंने सिर्फ असहाय, गरीबों और महिलाओं पर जुल्म किया. इसमें हिटलर और मुसोलिनी से लेकर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का नाम भी लिया जा सकता है. इन सबका अंत भी दुखद और क्रूर ही रहा. इस स्टोरी में हम बात करेंगे कि कैसे ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की छांव में बेटे ने दौलत का अंबार खड़ा किया. इसके लिए तरह-तरह के प्रपंच अपनाए गए.   

खामेनेई के बेटे ने कैसे बनाया ग्लोबल प्रॉपर्टी एम्पायर

सत्ता का नशा भले ही शख्स को लड़खड़ाने ना दे, लेकिन उसे निरंकुश जरूर बना देता है. खामेनेई भले ही सार्वजनिक रूप से भोग-विलासिता से दूर रहे, लेकिन उन्होंने वह सारे प्रपंच किए जो एक शासक-तानाशाह करता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि खामेनेई के ओवरसीज इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो जबरदस्त है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, ईरान के एलीट लोग कैपिटल को विदेश ले जाने में कामयाब रहे, यह बिना ईरान के सुप्रीम लीडर की सहमति के तो नहीं हो सकता है. हैरत की बात यह है कि ईरान पिछले दो दशकों से अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर इतिहास के सबसे कड़े बैन झेल रहा था. मोजतबा खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं.  मोजतबा की शादी 2004 में ज़हरा हद्दाद-अदेल से हुई है. वह ईरानी कंज़र्वेटिव पॉलिटिशियन और पार्लियामेंट के पूर्व चेयरमैन, ग़ुलाम-अली हद्दाद-अदेल की बेटी हैं. 

लग्जरी लाइफ जीता है बेटा

नॉर्थ लंदन में पेड़ों से भरी एक सड़क है, इसे “बिलियनेयर्स रो” के नाम से जाना जाता है. यहां पर ऊंची झाड़ियों और काले गेटों के पीछे ज़्यादातर खाली हवेलियां हैं. यहां पर जब मोजतबा खामेनेई के बच्चे स्कूल में घूमते हैं, तो काली SUV में प्राइवेट गार्ड बाहर गश्त करते हैं. इन्हें पिता खामेनेई लोगों को धार्मिक प्रवचन देते थे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, द बिशप्स एवेन्यू पर इन लग्ज़री घरों के बाहरी हिस्से के पीछे तेहरान से दुबई और फ्रैंकफर्ट तक फैला एक नेटवर्क है, जिसका संचालन जाहिर है मोजतबा खामेनेई के जरिये होता है. शेल कंपनियों की लेयर्स के ज़रिए रुतबा खास है.

बहुत कम लोग जानते हैं कि  इन शेल कंपनियों का असली मालिकाना हक मिडिल ईस्ट के सबसे ताकतवर लोगों में से एक मोजतबा खामेनेई के पास है. ये वही मोजतबा खामेनेई हैं, जो ईरान के सुप्रीम लीडर के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं. मोजतबा खामेनेई की पत्नी का नाम मंसूरेह खोजस्तेह बाघेरज़ादेह है. 

इन्वेस्टमेंट एम्पायर से जुड़े हैं मोजतबा खामेनेई

56 साल के कथित मौलवी मोजतबा खामेनेई को उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई का संभावित वारिस बताया जा रहा है.  जानी-मानी वेस्टर्न इंटेलिजेंस एजेंसी के असेसमेंट के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई एक बड़े इन्वेस्टमेंट एम्पायर की देखरेख करते हैं.

मोजतबा खामेनेई को लेकर कहा जाता है कि उनकी फाइनेंशियल पावर में पर्शियन गल्फ शिपिंग से लेकर स्विस बैंक अकाउंट्स भी हैं. यह भी कहा जाता है कि 100 मिलियन डॉलर ($138 मिलियन) से ज़्यादा की ब्रिटिश लग्ज़री प्रॉपर्टी तक सब कुछ के मालिक मोजतबा खामेनेई ही है. इन कंपनियों के जरिये खामेनेई को पश्चिमी बाज़ारों में फंड भेजने में मदद की गई है . 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,  इनमें कुछ लंदन के कई खास इलाकों में प्राइम रियल एस्टेट शामिल हैं. यहां पर एक घर की कीमत 2014 में 33.7 मिलियन यूरो थी. ब्लूमबर्ग को मिले डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, इन ट्रांज़ैक्शन के लिए फंड UK, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन और यूनाइटेड अरब अमीरात के बैंकों के अकाउंट्स के ज़रिए भेजे गए हैं. रोचक बात यह है कि ये फंड मुख्य रूप से ईरान में तेल की बिक्री से आए हैं. 

ब्लूमबर्ग को मिले किसी भी डॉक्यूमेंट में सीधे मोजतबा खामेनेई के नाम पर एसेट्स की लिस्ट नहीं है, लेकिन खरीदारी एक ईरानी बिज़नेसमैन अली अंसारी के नाम पर दिखाई देती हैं, जिन पर अक्टूबर में ब्रिटेन (UK) ने बैन लगाया था.  यह बात चौंकाती जरूर है कि वर्ष 1979 में गरीबों और इस्लाम के नाम पर अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के राजा को हटाने वाले क्रांतिकारी आंदोलन का हिस्सा थे.

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उन्होंने हमेशा एक सादगी और पवित्र जीवनशैली को कथित तौर पर जीने का दावा किया. यह भी स्पष्ट है कि ईरान में परिवार ने विदेशी संपत्ति का इस्तेमाल शानदार लाइफस्टाइल के लिए नहीं किया है. बावजूद इसके अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे की छिपी हुई दौलत, खासकर शासन द्वारा बढ़ावा दी गई पवित्रता की छवि के उलट है. 

बनाया $95 बिलियन का बिज़नेस एम्पायर

अयातुल्ला अली खामेनेई ने 36 साल और आठ महीने तक सत्ता संभाली. इस दौरान यानी साढ़े 3 दशक तक उनकी अगुवाई में ईरान महिलाओं पर बड़े पैमाने पर ज़ुल्म हुआ. जिसने विरोध किया मारा गया. आम लोगों का कत्लेआम हुआ और हमास और हिज़्बुल्लाह जैसे आतंकी ग्रुप्स को फंडिंग मिली.हैरत की बात यह है कि आम ईरानियों की हज़ारों प्रॉपर्टीज़ को सिस्टमैटिक तरीके से ज़ब्त करके लगभग $95 बिलियन का बिज़नेस एम्पायर बनाया गया.  

बताया जा रहा है कि बेटे मोजतबा खामेनेई की ईरानी इंडस्ट्री के लगभग हर सेक्टर में इसकी हिस्सेदारी है, जिसमें फाइनेंस, तेल, टेलीकम्युनिकेशन, बर्थ-कंट्रोल पिल्स का प्रोडक्शन और यहां तक ​​कि शुतुरमुर्ग पालन भी शामिल है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक जांच में पाया गया कि सेताद (SETAD) ने ईरानी अदालतों में कभी-कभी झूठे तरीके से, यह दावा करके रियल एस्टेट का एक बड़ा पोर्टफोलियो जमा किया कि संपत्तियां छोड़ दी गई हैं.

वर्ष 2013 के अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के एक रिपोर्ट के मुताबिक एक विशाल वित्तीय साम्राज्य के संरक्षक खामेनेई ही थे. इसकी कीमत 95 अरब डॉलर (लगभग 8.5 लाख करोड़ रुपये) से अधिक आंकी गई थी. इसके बाद से इसमें लगातार इजाफा होता रहा.

 यह संपत्ति केवल नकदी के रूप में नहीं, बल्कि ‘सेताद’ (SETAD) नामक एक शक्तिशाली संगठन के जरिये फैली. लोगों को यह जानकर हैरानी होगी खामेनेई की संपत्ति इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की संपत्ति से कहीं अधिक थी या कहें है.

कानूनी दायरे में छीनी गई संपत्तियां

SETAD के पास सर्वोच्च नेता के नाम पर संपत्ति लेने का अदालती आदेश वाला एकाधिकार है. SETAD नियमित रूप से जब्त की गई संपत्तियों को नीलामी में बेचता है या मूल मालिकों से भुगतान निकालने का प्रयास करता है. SETAD ने दर्जनों निजी और सार्वजनिक ईरानी कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदकर अपनी कॉर्पोरेट होल्डिंग्स का विस्तार किया.

आज भी SETAD की कुल संपत्ति का ठीक-ठीक पता लगाना मुश्किल है क्योंकि उसके अकाउंट्स सीक्रेट हैं. रॉयटर्स ने इसका अंदाज़ा लगभग $95 बिलियन लगाया है, जिसमें लगभग $52 बिलियन रियल एस्टेट और $43 बिलियन कॉर्पोरेट होल्डिंग्स शामिल हैं.

ईरान के टॉप मौलवी के तौर पर खामेनेई का सभी सरकारी मामलों में आखिरी फैसला होता था. उनके अधिकार क्षेत्र में उनके देश का विवादित न्यूक्लियर प्रोग्राम भी शामिल था, जो ईरान पर अमेरिकी और इज़राइली हमलों का एक बड़ा कारण था, जिससे आखिरकार उनकी हत्या हुई. 

 SETAD के शासन में जमा हुई दौलत के अलावा, खामेनेई के बेटे मोजतबा ने एक बहुत बड़ी दौलत जमा की है, जिसमें लंदन में मेगा-हवेलियां, दुबई में एक खास विला और कई लग्ज़री यूरोपियन होटल शामिल हैं.

संपत्तियों के लिए अपनाए गए

खामेनेई के 56 साल बेटे के विदेशी निवेश की एक साल तक चली जांच से उनकी बड़ी दौलत का पूरा खुलासा हुआ है. इसमें फारस की खाड़ी की शिपिंग, स्विस बैंक अकाउंट और लग्ज़री प्रॉपर्टी शामिल हैं – साथ ही उस मुश्किल नेटवर्क का भी पता चला है जिसकी वजह से वह 2019 में उन पर लगे पश्चिमी बैन से बच पाए.

खामेनेई के बेट मोजतबा के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के कुद्स फोर्स के कमांडर के साथ मिलकर काम करने और बासिज से जुड़े होने का पता चला, जो गार्ड्स से जुड़ा एक धार्मिक मिलिशिया है, ‘ताकि वह अपने पिता की अस्थिर करने वाली क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं और दमनकारी घरेलू मकसदों को आगे बढ़ा सके’. पिछले 2 दशकों के दौरान मोजतबा ने गार्ड्स के साथ करीबी रिश्ते बनाए हैं, जिससे उसे ईरान के राजनीतिक और सुरक्षा संगठनों में ज़्यादा फ़ायदा मिला है.

ब्लूमबर्ग की रिसर्च के मुताबिक, मोजतबा का नाम उनके कई एसेट्स पर कभी नहीं आता – जो शेल कंपनियों, बिचौलियों और UK, स्विट्जरलैंड, लिचेंस्टीन और यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) में मौजूद बैंक अकाउंट्स के स्पाइडर नेटवर्क के ज़रिए हासिल किए गए हैं, ये डील्स 2011 से चली आ रही हैं.  पोर्टफोलियो में द बिशप्स एवेन्यू में एक घर शामिल है, जिसे लंदन की ‘बिलियनेयर्स रो’ कहा जाता है, जिसे 2014 में £33.7m में खरीदा गया था.

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