जानें कैशलेस होने वाला पहला देश कौन सा है?

स्वीडन (Sweden) को दुनिया का पहला कैशलेस देश (First Cashless Country) माना जाता है. इस देश ने डिजिटल भुगतान (Digital Payments) और आधुनिक तकनीक (Modern Technology) को जिस तेजी से अपनाया है, उसने इसकी अर्थव्यवस्था और समाज को पूरी तरह बदल दिया है. आज स्वीडन में अधिकांश लेन-देन मोबाइल ऐप्स (Mobile Apps), कार्ड या ऑनलाइन माध्यमों से किए जाते हैं.

Published by DARSHNA DEEP

First cashless country in the world: स्वीडन दुनिया का पहला कैशलेस देश बन चुका है, जहां अधिकांश लेनदेन डिजिटल माध्यम से किए जाते हैं. ‘स्विश’ जैसे मोबाइल ऐप्स ने डिजिटल भुगतान को न सिर्फ तेज़ बल्कि और सुरक्षित बना दिया है. आप यह बात जानकर बेहद ही हैरान होंगे की इस देश में नकदी का इस्तेमाल लगभग पूरी तरह से खत्म हो गया है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों बढ़ी हैं. स्वीडन की यह पहल डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जिसने दुनिया के अन्य देशों के लिए एक ऐतिहासिक उदाहरण स्थापित कर दिया है. 

डिजिटल अर्थव्यवस्था की तरफ बड़ा कदम

स्वीडन ने 2000 के दशक की शुरुआत से ही डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना शुरू कर दिया था.  स्वीडन की सरकार ने बैंक और निजी क्षेत्र ने मिलकर डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करने का बड़ा फैसला लिया था. यहां तक की बैंकों ने एटीएम हटाने पूरी तरह से शुरू कर दिए थे और दुकानों ने “नो कैश” नीति अपनाने की शुरुआत की थी. लेकिन आज स्वीडन की 90 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या कार्ड और केवल मोबाइल पेमेंट का इस्तेमाल करती है. 

‘स्विश’ ऐप का सबसे महत्वपूर्ण योगदान

स्वीडन में ‘Swish’ नाम  के मोबाइल भुगतान ऐप का इसमे सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है. साल 2012 में लॉन्च किया गया यह ऐप बैंकों और रिक्सबैंक (स्वीडन के केंद्रीय बैंक) के सहयोग से ही बन पाया था. इसके जरिए लोग मोबाइल नंबर से तुरंत पैसे भेज या फिर प्राप्त कर सकते हैं. फिर चाहे छोटा लेन-देन हो या फिर टैक्सी किराया देना, अपने परिजनों और दोस्तों को पैसे भेजना, सब कुछ ‘स्विश’मोबाइल भुगतान ऐप के जरिए चंद सेकंड में हो जाता है.

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सुरक्षा और पारदर्शिता पर लोगों ने किया विश्वास

डिजिटल भुगतान प्रणाली ने सुरक्षा को मजबूत करने पर भी काफी ज्यादा जोर दिया. बात करें  नकदी की चोरी या नकली नोट की समस्या को लेकर तो दोनों समस्याएं लगभग पूरी तरह से खत्म हो चुकी है. हर ट्रांज़ैक्शन डिजिटल रिकॉर्ड में रहता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और चोरी के मामलों में बेहद ही कमी देखने को मिली है. इसके अलावा, बैंक और सरकार साइबर सुरक्षा पर लगातार निवेश कर रहे हैं ताकि लोगों का भरोसा कायम रह सके. 

डिजिटल मुद्रा ई-क्रोना की क्या है शानदार पहल ?

स्वीडन का केंद्रीय बैंक ‘रिक्सबैंक’ अब अपनी डिजिटल मुद्रा यानी ई-क्रोना (e-krona) पर लगातार काम करने में जुटा हुआ है. इसका सीधा मतलब डिजिटल लेनदेन को ज्यादा से ज्यादा सरक्षित और सरकार नियंत्रण में लाने की कोशिश करना है. अगर ई-क्रोना पूरी तरह से देश में लागू हो जाती है तो, यह दुनिया की पहली सरकारी डिजिटल मुद्रा में से एक साबित हो जाएगी. 

अन्य देशों पर कैसे पड़ेगा इसका अनोखा प्रभाव ?

स्वीडन के मॉडल से प्रेरित होकर फ़िनलैंड, नॉर्वे, डेनमार्क और यूके जैसे देश भी कैशलेस समाज बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. 

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