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मुगल हरम में बूढ़ी औरतों के साथ होता था बदसलूक! बीमार को छोड़ दिया जाता था मरने…

Mughal Harem Women: मुगल हरम में खूबसूरत और जवान लड़कियों की पूछ होती थी. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आखिर बूढ़ी और बीमार औरतों के साथ हरम में क्या किया जाता था.

By: Prachi Tandon | Published: September 28, 2025 12:12:56 PM IST



Mughal Harem Dark Secrets: मुगलों का हरम ऐसी जगह थी जहां दुनियाभर की खूबसूरत औरतों को रखा जाता था. यह औरतें मुगल बादशाहों की सेवा, मनोरंजन और उनके शौक पूरे करने के लिए होती थीं. मुगल हरम में सिर्फ रखैलें या दासियां नहीं, बल्कि बादशाह की बेगमें और शहजादियां भी रहती थीं. कई इतिहासकारों ने माना है कि हरम में कुछ सौ नहीं, बल्कि हजारों औरतें होती थीं. इनमें से कई जवान थीं, तो कई उम्रदराज थीं. 

जवान और खूबसूरत औरतों को बादशाह अपनी रखैल या दासी बनाते थे, लेकिन सबसे बुरा हाल बुजुर्ग और बूढ़ी औरतों का होता था. आइए, यहां जानते हैं कि आखिर हरम में बूढ़ी और बुजुर्ग औरतों का क्या हाल होता था और उनके साथ क्या किया जाता था. 

हरम में बूढ़ी औरतों के साथ क्या होता था?

मुगलों के हरम में औरतों के लिए कड़े और सख्त नियम होते थे. न तो उन्हें किसी से मिलने की इजाजत होती थी और न ही हरम से बाहर कदम रखने दिया जाता था. ऐसे में उनका पूरा जीवन हरम की चार दीवारी में गुजर जाता था. जवानी में फिर भी शान और शौकत के बीच औरतों की जिंदगी निकल जाती थी. लेकिन, बुढ़ापे और बीमारी में सबसे बुरा हाल होता था.  

मुगल हरम में बूढ़ी औरतों के साथ होता था बदसलूक! बीमार को छोड़ दिया जाता था मरने…

इतिहासकारों ने माना है कि जब हरम की कोई औरत बूढ़ी हो जाती थी और इस काबिल नहीं रहती थी कि बादशाह का मनोरंजन कर पाए, तब उसे दरकिनार कर दिया जाता था. बूढ़ी औरतों को हरम के उन कमरों में भेज दिया जाता था, जो अंधेरे से भरे होते थे और सबसे आखिरी में बने होते थे. 

बीमार औरतों के साथ क्या करते थे मुगल?

बीमार पड़ने पर भी मुगल हरम में औरतों को अकेलेपन में धकेल दिया जाता था. ऐसा माना जाता है कि हरम में बीमारखाना बनाया जाता था. यह एक तरह के खास कमरे होते थे, जहां औरतें तब तक रहती थीं, जब तक पूरी तरह से ठीक न हो जाएं. वहीं, अगर किसी को गंभीर बीमारी लग जाती तो वह मरते दम तक बीमारखाने में ही रहती थी.

कई इतिहासकारों ने मुगल हरम का जिक्र करते हुए बताया है कि बीमारखाने में बूढ़ी औरतों को सेवा के लिए लगाया जाता था. ऐसे में यह साफ तौर पर समझा जा सकता है कि चाहे बीमारी हो या बुढ़ापा एक बार हरम में कदम रखने के बाद औरत बाहर नहीं जा सकती थी. मरने के बाद उसकी अर्थी ही बाहर निकलती थी. 

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