Noida School Bomb Threat: बुधवार को नोएडा के कई स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल मिले. उस समय स्कूलों में सीबीएसई के बोर्ड एग्जाम चल रहे थे. अचानक आई इस खबर से छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों में घबराहट फैल गई. अधिकारियों के अनुसार एक दर्जन से ज्यादा स्कूलों को ईमेल भेजकर परिसर में विस्फोटक होने की चेतावनी दी गई थी.
धमकी मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गए. अलग-अलग टीमों को तुरंत स्कूलों में भेजा गया. सुरक्षा के तौर पर बच्चों और स्टाफ को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया और पूरे परिसर की गहन तलाशी शुरू की गई. बम निरोधक दस्ता और खोजी कुत्तों की मदद से कक्षाओं, मैदानों और अन्य कमरों की जांच की गई. अधिकारियों ने कहा कि ये कदम केवल सावधानी के लिए उठाए गए हैं ताकि किसी भी तरह का खतरा न रहे.
पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी धमकियां
ये पहली बार नहीं है जब नोएडा के स्कूलों को इस तरह की धमकी मिली हो. इससे पहले 23 जनवरी को भी करीब 20 स्कूलों को इसी तरह के ईमेल भेजे गए थे. उस समय गणतंत्र दिवस नजदीक था, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा सतर्क हो गई थीं. पुलिस, फायर ब्रिगेड और बम निरोधक टीमों ने स्कूल परिसरों में लंबी जांच की थी. बाद में ये सभी धमकियां झूठी साबित हुई थीं.
छह लोगों की गिरफ्तारी
पिछले सप्ताह 15 फरवरी को पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया था. जांच के दौरान पता चला कि धमकी भरे ईमेल पहले अमेरिका के सर्वर से भेजे गए लग रहे थे, लेकिन तकनीकी जांच के बाद उनका स्रोत ग्रेटर नोएडा के बिसरख इलाके में एक मकान तक पहुंचा. पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी ईमेल आईडी और इंटरनेट कॉलिंग नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे. साथ ही वे अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार भी चला रहे थे.
कानून के तहत कार्रवाई
इस मामले की जांच के लिए सूरजपुर थाने में मामला दर्ज किया गया. आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(4) और 353(4)(b) के तहत केस दर्ज किया गया है. इसके अलावा इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66 भी लगाई गई है. ये धाराएं आपराधिक धमकी और अफवाह फैलाकर सार्वजनिक शांति भंग करने से जुड़ी हैं.
बरामद हुए कई उपकरण
पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने से चार लैपटॉप, 22 मोबाइल फोन, 16 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, दो नेपाली पासपोर्ट, पहचान पत्र, एक चेकबुक और 19,500 रुपये नकद बरामद किए हैं. इन सभी सामानों की जांच की जा रही है ताकि ये पता लगाया जा सके कि इस ग्रुप का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें और कौन-कौन शामिल है.
फिलहाल ताजा धमकी वाले ईमेल की भी जांच जारी है. प्रशासन का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अफवाह से बचने की जरूरत है. पुलिस साइबर विशेषज्ञों की मदद से ईमेल भेजने वालों की पहचान करने में जुटी है.