Kanpur News: कानपुर जिला कारागार से चार कैदियों की रिहाई, समाजसेवी संस्था ने भरी जुर्माने की राशि

Kanpur News: कानपुर जिला कारागार से मंगलवार को चार कैदी रिहा कर दिए गए। यह सभी अपनी मूल सजा पूरी कर चुके थे, लेकिन जुर्माने की धनराशि अदा न कर पाने की वजह से जेल की दीवारों के भीतर ही बंद थे। समाजसेवी संस्था श्री सनातन धर्म हनुमान मंदिर सभा ने आगे बढ़कर इन कैदियों का जुर्माना अदा किया और उन्हें नई जिंदगी जीने का अवसर प्रदान किया।

Published by Mohammad Nematullah

जेबा की रिपोर्ट, Kanpur News: कानपुर जिला कारागार से मंगलवार को चार कैदी रिहा कर दिए गए। यह सभी अपनी मूल सजा पूरी कर चुके थे, लेकिन जुर्माने की धनराशि अदा न कर पाने की वजह से जेल की दीवारों के भीतर ही बंद थे। समाजसेवी संस्था श्री सनातन धर्म हनुमान मंदिर सभा ने आगे बढ़कर इन कैदियों का जुर्माना अदा किया और उन्हें नई जिंदगी जीने का अवसर प्रदान किया। जेल अधीक्षक डॉ. बी.डी. पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि रिहा किए गए कैदियों में लियाकत अली, मोहम्मद अलताफ, रोशन अली और सोमिल गुप्ता शामिल हैं। इन सभी पर 15 से 25 हजार रुपये तक का जुर्माना निर्धारित था। मूल सजा पूरी होने के बावजूद आर्थिक अभाव के कारण ये लोग रिहा नहीं हो पा रहे थे। संस्था के हस्तक्षेप से यह संभव हो सका और मंगलवार को औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर चारों को जेल से बाहर भेज दिया गया।

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जेल में बंद उन लोगों की मदद करते

इस मौके पर संस्था के प्रधान राजेश भल्ला स्वयं मौजूद रहे। उनके साथ जेलर अनिल कुमार पांडेय, डिप्टी जेलर अरुण कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने संस्था की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कदम समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और जेल में बंद उन लोगों की मदद करते हैं जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण अतिरिक्त सजा भुगतने को मजबूर हो जाते हैं। रिहाई पाने वाले कैदियों के चेहरों पर भी खुशी साफ देखी गई। जेल प्रशासन का मानना है कि जब ऐसे कैदी समाज में लौटेंगे तो उन्हें सुधार की नई राह मिलेगी। इस तरह की पहल न केवल मानवीय दृष्टिकोण से सराहनीय है, बल्कि सामाजिक पुनर्वास की दिशा में भी अहम योगदान है।

समय-समय पर कैदियों को राहत

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश की जेलों में अक्सर ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां दोषसिद्ध व्यक्ति अपनी पूरी सजा काट लेने के बावजूद केवल जुर्माना न भर पाने की स्थिति में जेल में ही रह जाते हैं। इस वजह से समाजसेवी संगठनों और दानदाताओं की मदद से समय-समय पर कैदियों को राहत दी जाती रही है। कानपुर की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि सामाजिक भागीदारी से बदलाव की राह आसान बनती है। चार परिवारों को अपने सदस्य वापस मिले और समाज में एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित हुआ।

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