Holika Dahan Viral Video: मथुरा के छाता तहसील क्षेत्र का गांव फालेन भक्त प्रहलाद की नगरी के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर है. इस गांव में एक अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है. यहां पंडा समाज के परिवार से एक सदस्य को हर साल होलिकी की धधकते अंगारों के बीच से निकलता है. खास बात तो यह है कि उसके शरीर पर एक खरोच तक नहीं आती है.
होलिका का अनोखी परंपरा
बता दें कि, यह दहन सोमवार की देर रात फालेन गांव में किया गया था. 20 फीट ऊंची, 30 फुट लंबी होलिका को गांव के लोग एक साथ मिलकर रखते हैं. सोमवार, 2 मार्च 2026 को शुभ मुहूर्त के बाद पंडा समाज के सदस्य संजू पंडा होलिका दहन के अंगारों के बीच से बाहर निकला. इसे देखने के लिए वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने भक्त प्रह्लाद के जयकारे लगाए.
बहन करती है मदद
दरअसल, होलिका दहन के दिन भक्त प्रह्लाद की कठोर तपस्या करने के बाद प्राचीन भक्त प्रह्लाद के कुंड में स्नान करने के बाद होलिका के बीच से निकलने की तैयारी की जाती है. उससे पहले बहन दूध की धार देते हुए होलिका से निकलने का रास्ता देती हैं. उसके बाद होलिका के बीच अंगारों में से निकलकर बाहर आना पड़ता है. शरीर पर अग्नि देव किसी तरह की कोई हानि नहीं होने देती है.
#WATCH | Mathura, UP: Following a very long tradition, a person portraying Prahlad walks through the Holika pyre at Phalen village.
Sanju Panda, who walked into the pyre, says, “…The preparation for this starts from Basant Panchami to Holika Dahan… At that time, attachment… pic.twitter.com/nzBKyciEG5
— ANI (@ANI) March 3, 2026
45 दिन की कठोर तपस्या
फालेन गांव में होलिका की परंपरा निभाने के लिए पंडा समाज के सदस्य संजू पिछले 2 बार से इस परंपरा को निभा रहे हैं. भक्त प्रह्लाद के प्राचीन मंदिर में कठोर तपस्या करते हैं. यह तपस्या 45 दिनों तक की जाती है. तपस्या पर बैठने के लिए एक वक्त का भजन व फलाहार करना होता है. इस दौरान किसी भी व्यक्ति से मिलना वर्जित होता है. मंदिर परिसर में ही तपस्या में लीन होना होता है.
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दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
फालेन गांव की होलिका देखने के लिए श्रद्धालु भारी संख्या में आते हैं. क्योंकि होलिका के बीच से निकलने वाले पंडा को देखने के लिए आते हैं. गांव में जिला प्रशासन की तरफ कई तरह की व्यवस्थाए करते हैं. होलिका दहन के पर्व को लेकर झांझ, मंजीरा के साथ नाचते हुए श्रद्धालु भी होली का खूब आनंद लेते हैं.
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