Delhi blast : अल-फलाह यूनिवर्सिटी के बाद, जांच एजेंसियों का फोकस इस मेडिकल कॉलेज पर; निकाली जा रही डॉक्टरों की कुंडली

GSVM Medical College Kanpur: कॉलेज प्रशासन ने पिछले वर्षों के उपस्थिति रजिस्टर, बायोमीट्रिक रिकॉर्ड, विभागीय फाइलें, छुट्टी आवेदन और नियुक्ति पत्र निकालकर जांच टीम को सौंप दिए हैं.

Published by Shubahm Srivastava

Delhi Red Fort Blast: कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में डॉ. शाहीन के आतंकी कनेक्शन उजागर होने के बाद पूरे कॉलेज प्रशासन में भारी हलचल मच गई है. यह मामला सामने आते ही जांच एजेंसियों—एटीएस और इंटेलिजेंस—ने न सिर्फ डॉ. शाहीन बल्कि कॉलेज से कई साल पहले अचानक गायब हुए डॉक्टरों के पुराने रिकॉर्ड की भी गहन छानबीन शुरू कर दी है. 

वर्ष 2021 में शासन ने ऐसे कई डॉक्टरों को निलंबित किया था, जो बिना सूचना लंबे समय तक ड्यूटी पर नहीं आए थे और नोटिस भेजे जाने के बावजूद जवाब नहीं देते थे. अब इन सभी निलंबित डॉक्टरों की गतिविधियों, लोकेशन हिस्ट्री, संपर्कों और वित्तीय लेनदेनों की 5–7 वर्षों की गहराई से जांच की जा रही है. 

नियुक्ति, छुट्टी, अनुपस्थिति और मूवमेंट का डाटा इंटेलिजेंस को सौंपा

प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि कॉलेज में वर्तमान में 230 डॉक्टर कार्यरत हैं, जिनमें 130 रेगुलर और बाकी संविदा पर हैं. शाहीन मामले के बाद प्रत्येक डॉक्टर की नियुक्ति, छुट्टी, अनुपस्थिति और मूवमेंट से जुड़ा डेटा एक बार फिर एटीएस और इंटेलिजेंस को सौंपा गया है. एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि गैरहाजिर डॉक्टर इतने साल कहां रहे, किनसे संपर्क में थे और क्या उनके व्यवहार में कोई संदिग्ध पैटर्न नजर आता है. जिन डॉक्टरों की जांच पर सबसे ज्यादा फोकस है उनमें हिफज़ुल रहमान, डॉ. निसार, डॉ. हामिद, परवेज अहमद, विभुद प्रताप सिंह, डॉ. समता गुप्ता और श्रवण प्रताप सिंह शामिल हैं.

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मेडिकल कॉलेज प्राचार्य की कर्मचारियों से अपील

डॉ. शाहीन केस के बाद मेडिकल कॉलेज का माहौल पूरी तरह बदल चुका है. जहाँ पहले विभागों में सामान्य गतिविधियाँ चलती थीं, अब वहां सन्नाटा और डर का माहौल है. डॉक्टर आपस में धीमी आवाज में चर्चा कर रहे हैं पर खुलकर कोई बोलने को तैयार नहीं है. प्राचार्य ने सभी कर्मचारियों से अपील की है कि यदि किसी के पास किसी भी डॉक्टर के बारे में पुरानी या नई जानकारी हो, तो उसे गोपनीय रूप से प्रशासन या एजेंसियों को दें.

संविदा डॉक्टरों की भी हो रही जांच

 कॉलेज प्रशासन ने पिछले वर्षों के उपस्थिति रजिस्टर, बायोमीट्रिक रिकॉर्ड, विभागीय फाइलें, छुट्टी आवेदन और नियुक्ति पत्र निकालकर जांच टीम को सौंप दिए हैं. जम्मू-कश्मीर या अन्य राज्यों से आए डॉक्टरों का पूरा विवरण भी दुबारा जांचा जा रहा है. साथ ही संविदा डॉक्टरों की बैकग्राउंड जांच भी तेज कर दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं किसी डॉक्टर की लंबी अवधि की गैरहाजिरी किसी संदिग्ध गतिविधि से तो जुड़ी नहीं.

जांच की तेजी और गहनता को देखते हुए यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में निलंबित एवं गायब डॉक्टरों से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज अब पूरी तरह सतर्क मोड में है और प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न होने पाए.

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