T20 World Cup 2026: T20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया की बैटिंग एक बड़ी प्रॉब्लम का सामना कर रही है. राइट-आर्म ऑफ-स्पिनर्स के खिलाफ उसका खराब परफॉर्मेंस है. टूर्नामेंट के शुरुआती स्टेज से ही विरोधी टीम के कप्तान भारत के टॉप ऑर्डर को रोकने और पावरप्ले में ऑफ-स्पिनर्स को बॉल देकर विकेट लेने में कामयाब रहे है. यह स्ट्रैटेजी अब टीम के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गई है, क्योंकि इससे शुरुआती झटके लगते हैं और मिडिल ऑर्डर पर प्रेशर बढ़ता है.
ऑफ-स्पिनर्स के खिलाफ खराब परफॉर्मेंस
स्टैटिस्टिक्स के हिसाब से पूरे टूर्नामेंट में इंडिया के विकेट का एक बड़ा हिस्सा ऑफ-स्पिनर्स ने लिया है. इन पांच मैचों में ऑफ-स्पिनर्स ने इंडिया के 41 विकेटों में से लगभग एक चौथाई, यानी 12 विकेट लिए हैं. विरोधी टीमों ने इस कमजोरी को पहचान लिया है और लगातार इसका फायदा उठा रही है. इसका एक बड़ा कारण टीम की बैटिंग लाइनअप में बाएं हाथ के बैट्समैन की ज़्यादा संख्या है. ओपनर इशान किशन और अभिषेक शर्मा दोनों लेफ्ट-हैंडेड हैं, और तिलक वर्मा भी टॉप ऑर्डर में लेफ्ट-हैंडर है. ऑफ-स्पिनर अक्सर लेफ्ट-हैंडर्स से दूर स्विंग करते हैं, जिससे उन्हें खेलना मुश्किल हो जाता है और गलत टाइमिंग वाले शॉट का रिस्क बढ़ जाता है.
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यह पैटर्न ग्रुप स्टेज में साफ दिखा है. पाकिस्तान के खिलाफ कैप्टन सलमान आगा ने पहला ओवर ऑफ-स्पिन से फेंका और अभिषेक शर्मा को जल्दी आउट कर दिया था. नीदरलैंड्स ने भी आर्यन दत्त से पारी की शुरुआत करवाई, जिन्होंने अभिषेक को आउट किया और फिर इशान किशन को परेशान किया है. नामीबिया के गेरहार्ड इरास्मस ने अपनी ऑफ-स्पिन से चार विकेट लिए जिससे इंडियन बैट्समैन पूरी तरह फंस गए थे. अब सुपर 8 में साउथ अफ्रीका के एडेन मार्करम ने भी यही स्ट्रैटेजी अपनाई है. उन्होंने पहला ओवर खुद फेंका और इशान किशन को बिना खाता खोले आउट कर दिया था. इस मैच में इंडिया की शुरुआत खराब रही, जिससे पूरी इनिंग लड़खड़ा गई थी.
इंडिया के खिलाफ ऑफ-स्पिनर्स का परफॉर्मेंस
सुपर 8 में इंडिया का सामना जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के मजबूत ऑफ-स्पिनर्स से होगा. जिम्बाब्वे के सिकंदर रजा और ब्रायन बेनेट, और वेस्टइंडीज के रोस्टन चेस जैसे खिलाड़ी इंडिया के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है. ये बॉलर्स अनुभवी है और लेफ्ट-हैंडर्स को परेशान करने में माहिर है. अगर टीम इंडिया इस कमजोरी को दूर नहीं करती है, तो सेमीफाइनल का रास्ता और भी मुश्किल हो जाएगा.
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टीम मैनेजमेंट को एक बड़ा कदम उठाने की जरूरत
टीम मैनेजमेंट के सामने अब टॉप ऑर्डर में बदलाव करके बैलेंस लाने की चुनौती है, जैसे दाएं हाथ के बैट्समैन को ऊपर लाना या टैक्टिक्स में बदलाव करना है. असिस्टेंट कोच रयान टेन डोएशेट ने संजू सैमसन की एंट्री का भी संकेत दिया है, जो दाएं हाथ के हैं और ऑफ-स्पिन के खिलाफ फायदा दे सकता है. सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम को आने वाले मैचों में ऑफ-स्पिनर्स के जाल को तोड़ने और मजबूत वापसी करने के लिए इस मुद्दे को तुरंत हल करना होगा. क्रिकेट में सिर्फ़ वही टीमें तेज़ी से आगे बढ़ती हैं जो ऐसी कमज़ोरियों को दूर करती है. क्या भारत ऐसा कर पाएगा?