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Rath Saptami 2026: जनवरी में इस दिन मनाई जाएगी रथ सप्तमी, जानें इस दिन का महत्व और शुभ मुहूर्त

Rath Saptami 2026: रथ सप्तमी का पर्व ग्रहों के राजा सूर्य देव को समर्पित है. इस दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना करने का विधान है. जानते हैं हिंदू धर्म में क्या है रथ सप्तमी का महत्व और क्यों मनाया जाता है यह खास पर्व.

By: Tavishi Kalra | Published: January 20, 2026 8:25:52 AM IST



Rath Saptami 2026 Date: हिंदू धर्म में हर पर्व, त्योहार और तिथि का अपना अलग और विशेष महत्व है. साल 2026 में रथ सप्तमी का पर्व हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन माघ सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है.

रथ सप्तमी एक बहुत ही शुभ दिन है, इस पावन अवसर पर दान-पुण्य करना फलदायी माना जाता है. रथ सप्तमी का पर्व ग्रहों के राजा सूर्य देव को समर्पित है. इस दिन सूर्यदेव की पूजा करने और व्रत का पालन करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है.

रथ सप्तमी 2026 तिथि

इस दिन सप्तमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी, 2026 को सुबह 5 बजकर 39 मिनट पर होगी. साथ ही सप्तमी तिथि समाप्त 26 जनवरी को सुबह 4 बजकर 10 मिनट पर होगी. संयोग से 25 जनवरी को रथ सप्तमी के दिन रविवार का संयोग बन रहा है. रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है. 25 जनवरी को रथ सप्तमी और रविवार का संयोग बनने से इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ गया है.

रथ सप्तमी के दिन स्नान मुहूर्त –

इस दिन स्नान का शुभ मुहूर्त 24 जनवरी को सुबह 5 बजकर 08 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. जिसकी कुल अवधि 1 घंटा 20 मिनट रहेगी.

क्यों मनाते हैं रथ सप्तमी ?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस पर्व को मानने का एक विशेष कारण है.माना जाता है कि रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य देव ने समस्त संसार को प्रकाशित करना शुरू किया था. इसीलिए इस विशेष दिन को भगवान सूर्य के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है. रथ सप्तमी को सूर्य जयन्ती के रूप में भी जाना जाता है.

रथ सप्तमी के दिन क्या करें?

  • रथ सप्तमी के दिन सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करने से ज्ञात, अज्ञात, शाब्दिक, शारीरिक, मानसिक, वर्तमान जन्म और पूर्व जन्मों में किये हुये, यह सात प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं.
  • रथ सप्तमी के दिन अरुणोदय काल यानि वह काल जब पूर्व दिशा में निकलते हुए सूर्य की लाली दिखाई पड़ती है, इस काल में स्नान करना शुभ माना जाता है. माना जाता है इस काल में स्नान करने से सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है. 
  • इस दिन स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें. इस दिन हाथ जोड़कर एक छोटे कलश से धीरे-धीरे भगवान सूर्य को जल अर्पित करें, 
  • घी का दीप जलाकर और कपूर, धूप और लाल पुष्पों से सूर्यदेव की पूजा करनी चाहिए.

माना जाता है इस दिन प्रातः काल स्नान, दान-पुण्य और सूर्यदेव को अर्घ्यदान करने से दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है.

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