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Premanand Ji Maharaj: शरीर और संसार अपना नहीं है- यह अनुभव मनुष्य को कब आता है, जानें प्रेमानंद जी महाराज से

Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल वचन लोगों को उनके जीवन के प्रेरित करते हैं. नाम जप, भगवान की सेवा, माता-पिता की सेवा करना ही परम सेवा है. जानते हैं प्रेमानंद जी महाराज से मनुष्य को कब इस बात का अनुभव होता है कि शरीर और संसार अपना नहीं है.

By: Tavishi Kalra | Last Updated: January 4, 2026 3:18:30 PM IST



Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज, एक हिंदू तपस्वी और गुरु हैं, जो राधावल्लभ संप्रदाय को मानते हैं. प्रेमानंद जी महाराज अपनी भक्ति, सरल जीवन, और मधुर कथाओं के लिए लोगों में काफी प्रसिद्ध हैं. हर रोज लोग उनके कार्यक्रम में शामिल होते हैं जहां वह लोगों के सवालों के जवाब देते हैं.हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं. उनके प्रवचन, जो दिल को छू जाते हैं, ने उन्हें बच्चों और युवाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया है. प्रेमानंद जी महाराज नाम जप करने के लिए के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं और साफ मन से अपने काम को करें और सच्चा भाव रखें.

भक्त के सवाल पर प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि मनुष्य को कब इस बात का अनुभव होता है कि शरीर और संसार अपना नहीं है, जानें प्रेमानंद जी महाराज से

प्रेमानंद जी महाराज का मानना है कि जब निरंतर नाम जप चलने लगेगा, तब यह ज्ञान हो जाएगा कि संसार, संसार नहीं है यह भगवान ही है. तब भगवान अपने लगने लगते हैं. जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि! बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि!! अर्थात् -जगत में जितने जड़ और चेतन जीव हैं, सबको राममय जानकर मैं उन सबके चरण-कमलों की सदा दोनों हाथ जोड़कर प्रमाण करें. आधयात्म में उन्नति करें, सत्संग करें, नाम जप करें, शासित्र पढ़ें, गंदे आचरण का त्याग करें, माता-बहनों की रक्षा करें, आधयात्मवान बनें, भगवान की कृपा बनेगी.

मनुष्य जन्म मिला ही उन्नति के लिए है. लोग गलत आचरणों में लगे रहते हैं, विषय में लगे रहते हैं, गलत संग में अपना पतन कर लेते हैं फिर 84 हजार युनियों में नाना प्रकार के दंड भोगते रहते हैं.

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