What is Panchdhatu | Panchdhatu vs Gold: आभूषण और ताबीज अक्सर पंचधातु से बनाए जाते हैं. सोना अपने आप में बहुत मूल्यवान माना जाता है, लेकिन पंचधातु को उससे भी ज्यादा शुभ इसलिए माना गया है क्योंकि इसमें पांच धातुओं के गुण एक साथ होते हैं. हमारे देश में ऐसे बहुत से लोग है जिन्हें पंचधातु के बारे में नहीं पता होता है. आज हम आपको पंचधातु के बारे में सबकुछ बताएंगे.
क्या होता है पंचधातु?
पंचधातु पांच मेन धातुओं सोना, चांदी, तांबा, लोहा और जस्ता/पीतल (कही-कही जस्ते के स्थान पर शीशा या पीतल) का एक पवित्र मिश्रण है. ये मिश्र धातु मेन रूप से हिंदू और जैन धर्म में मूर्तियों, मंदिरों के आभूषणों, यंत्रों और ज्योतिषीय अंगूठी/कड़े के निर्माण में उपयोग की जाती है.
पंचधातु में शामिल पांच धातुएं
प्राचीन ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार असली पंचधातु में ये धातुएं होती हैं:
सोना (स्वर्ण)- ये आत्मिक शक्ति और तेज का प्रतीक माना जाता है. इसका संबंध सूर्य से जोड़ा जाता है.
चांदी (रजत)- चांदी मन को शांत रखने और भावनाओं में संतुलन लाने से जुड़ी मानी जाती है. इसे चंद्रमा का धातु कहा गया है.
तांबा (ताम्र)
तांबा शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को बेहतर करने से जोड़ा जाता है. ये प्रेम और रचनात्मकता का भी संकेत माना जाता है.
लोहा (लौह)
लोहा मजबूती और स्थिरता का प्रतीक है. इसे नकारात्मक प्रभावों को दूर करने वाला माना गया है.
जस्ता / टिन / सीसा
पांचवीं धातु परंपरा के अनुसार बदल सकती है. इसका काम शरीर और ऊर्जा को जमीन से जोड़कर संतुलन बनाना माना जाता है.
केवल सोने से अलग क्यों है पंचधातु
सोना धन और समृद्धि का प्रतीक है, लेकिन पंचधातु को उससे आगे माना गया है. इसका कारण ये है कि इसमें अलग-अलग धातुओं के गुण मिलकर एक संतुलन बनाते हैं.
ये पांच तत्वों की ऊर्जा को संतुलित करने का प्रतीक माना जाता है.
मन और शरीर की ऊर्जा को एक साथ साधने से जोड़ा जाता है.
इसे नकारात्मक प्रभावों से बचाने वाला माना गया है.
मूर्तियों में उपयोग करने पर इसे दिव्य ऊर्जा को धारण करने योग्य माना जाता है.
पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताएं
महाभारत की कथा- एक मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण ने अर्जुन को पंचधातु से बना कवच या ढाल दी थी, जो उसकी रक्षा करता था.
मूर्ति निर्माण की परंपरा- प्राचीन समय में पंचधातु से मूर्ति बनाने की विधि बहुत गोपनीय मानी जाती थी. सही अनुपात को आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद जरूरी समझा जाता था.
शिल्प शास्त्र- संस्कृत के शिल्प ग्रंथों में मूर्ति निर्माण के लिए पंचधातु के नियम और धातुओं के अनुपात बताए गए हैं.
क्या पंचधातु में सोने का स्थान बदला जा सकता है
पुराने समय में जब सोना और चांदी महंगे होते थे, तब कई बार इनके स्थान पर अन्य धातुओं का प्रयोग किया गया. लेकिन पारंपरिक और शुद्ध पंचधातु में सोना और चांदी दोनों शामिल माने जाते हैं. कुछ जगहों पर सोने की जगह पीतल जैसे धातु का उपयोग किया गया. पांचवीं धातु क्षेत्र और परंपरा के अनुसार बदलती रही.
धार्मिक और दैनिक उपयोग
मंदिरों की मूर्तियां- पंचधातु का सबसे मेन उपयोग देवी-देवताओं की मूर्तियों में होता है.
ज्योतिषीय आभूषण- अंगूठी, कड़ा या लॉकेट के रूप में इसे पहनने की परंपरा है.
रत्न जड़ाई- नीलम, माणिक जैसे रत्नों को जड़ने के लिए पंचधातु को उपयुक्त माना जाता है.
आयुर्वेद में उपयोग- कुछ धातुओं से बनी भस्म का प्रयोग औषधियों में किया जाता है, लेकिन ये केवल जानकार वैद्यों की देखरेख में ही किया जाता है.