Chhath Puja 2025: जानें क्यों कुछ लोग पीतल सुपा चुनते हैं और कुछ बांस

चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में व्रती महिलाएं कठोर नियमों का पालन करती हैं और हर चीज में पवित्रता का विशेष ध्यान रखती हैं. पूजा में इस्तेमाल होने वाले सामानों का भी खास महत्व होता है, जिनमें ‘सूप’ या ‘सुपा’ का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है.

Published by Komal Singh

छठ पूजा भारत के सबसे पवित्र और प्रकृति से जुड़े त्योहारों में से एक है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की आराधना की जाती है. यह पर्व सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि शुद्धता, समर्पण और कृतज्ञता की भावना को भी दर्शाता है.पारंपरिक रूप से, छठ पूजा में बांस के सूप का उपयोग किया जाता है, लेकिन आजकल कई लोग पीतल के सूप का भी प्रयोग करने लगे हैं. ऐसे में मन में सवाल उठता है. कौन सा सुपा अधिक शुभ होता है और क्यों? धर्मशास्त्रों के अनुसार, दोनों ही पवित्र माने गए हैं, परंतु इनका महत्व, प्रतीक और उपयोग का कारण थोड़ा अलग है. आइए जानते हैं विस्तार से कि बांस और पीतल के सूप में क्या फर्क है और छठ पूजा में किसका चयन अधिक मंगलकारी माना गया है.

 

बांस का सुपा परंपरा

छठ पूजा में बांस का सुपा सबसे शुभ और पारंपरिक माना जाता है क्योंकि यह प्रकृति और सादगी का प्रतीक है. बांस धरती से जुड़ा, पर्यावरण के अनुकूल और शुद्ध माना जाता है. पुराणों में कहा गया है कि सूर्य देवता को अर्पण की वस्तुएं प्राकृतिक रूप में दी जाएं. बांस का सुपा न सिर्फ पर्यावरण के प्रति सम्मान दर्शाता है, बल्कि इसमें रखे फल और अन्न सूर्य देव तक शुद्ध रूप में पहुंचते हैं.

 

बांस के सूप में मौजूद पवित्रता का कारण

बांस अपने आप में जीवन, लचीलापन और सकारात्मकता का प्रतीक है. यह झुककर भी मजबूत रहने का संदेश देता है, जो छठ व्रत की विनम्रता को दर्शाता है. बांस में कोई रासायनिक तत्व नहीं होता, इसलिए यह व्रत के नियमों के अनुरूप पूरी तरह से शुद्ध माना जाता है. मान्यता है कि बांस का सुपा छठी मैया को अत्यंत प्रिय होता है और इससे पूजा में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.

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पीतल का सुपा

आधुनिक समय में कई लोग पीतल के सूप का प्रयोग करते हैं क्योंकि यह टिकाऊ और आकर्षक होता है. पीतल को हिंदू धर्म में शुभ धातु माना गया है और इससे बनी वस्तुएं पूजा में ऊर्जा को स्थिर रखती हैं. अगर शुद्ध मन से और श्रद्धा के साथ पीतल का सुपा इस्तेमाल किया जाए, तो यह भी शुभ फल देता है. हालांकि, इसे प्रयोग करने से पहले गंगाजल से शुद्ध करना आवश्यक माना गया है.

 

पीतल के सूप का धार्मिक महत्व

पीतल सूर्य की धातु मानी जाती है, इसलिए इसे छठ पूजा से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि पीतल का प्रयोग सूर्य देव की ऊर्जा को आकर्षित करता है और घर में समृद्धि लाता है. हालांकि, पुराणों के अनुसार प्राकृतिक वस्तुएं जैसे बांस अधिक पवित्र मानी जाती हैं. इसलिए, अगर पीतल का सुपा इस्तेमाल किया जाए तो उसमें श्रद्धा और पवित्रता की भावना होना सबसे जरूरी है.

Komal Singh

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